पटना: बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश के 6 महीने बाद भी बिना विधायक बने मंत्री पद पर बने रहने पर गुरूवार को आई सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के महज 24 घंटे के अंदर शुक्रवार को बिहार की राजनीति में सियासी उलटफेर देखने को मिला, जब बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनका कार्यकाल खत्म होने में सात महीने से भी अधिक का समय शेष था. इस इस्तीफे के बाद अब रालोमो अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचा रहना तय माना जा रहा है.
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राज्यपाल कोटे से एमएलसी थे देवेश कुमार
देवेश कुमार राज्यपाल कोटे से एमएलसी थे. कार्यकाल की बात करें तो अभी देवेश कुमार के पास सात महीने से कुछ अधिक समय का कार्यकाल शेष था. अब इस बचे हुए कार्यकाल के लिए दीपक प्रकाश एमएलसी बनेंगे. उनके एमएलसी बनने से मंत्री पद बचा रहेगा.
मिली जानकारी के अनसुार, बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार का इस्तीफा विधान परिषद के सभापति को सौंपा. देवेश कुमार खुद भी पहुंचे थे. अब जल्द ही राज्यपाल से इस सीट के लिए मनोनयन की प्रक्रिया आरंभ हो सकती है। संभावना है कि दीपक प्रकाश का मनोनयन की घोषणा जल्द हो सकती है।
बिना विधायक बने दो बार बने मंत्री
बता दें कि दीपक प्रकाश बिहार सरकार में पंचायती राज विभाग के मंत्री हैं. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार बिना किसी सदन के सदस्य रहते हुए पहली बार दीपक प्रकाश को नीतीश सरकार में और उसके बाद 16 अप्रैल को गठित सम्राट चौधरी सरकार में मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?
इससे पहले मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर गुरूवार को कानूनी सवाल खड़े हो गए, जब सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिहार सरकार से पूछा कि छह महीने बाद भी विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं बनने के बावजूद वह मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं? मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार को यह बताना होगा कि कोई मंत्री बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने 6 महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बना रह सकता है?


