नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर शनिवार तड़के 28 जून से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई. इस संबंध में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया है कि सोनम वांगचुक को पुलिस जबरन उठाकर ले गई और छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया.
Highlights:
इससे पहले सोनम वांगचुक ने अनशन के 21वें दिन में प्रवेश करने के ठीक पहले शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी स्वास्थ्य स्थिति और आंदोलन को लेकर बात की. उन्होंने कहा कि अनशन के दौरान उनके शरीर का क़रीब 20 फ़ीसदी हिस्सा ख़त्म हो चुका है, लेकिन उनका दिमाग़ अब भी पूरी तरह से काम कर रहा है.
उन्होंने कहा, “मैं अभी भी ज़िंदा हूं. मेरे शरीर का लगभग 20 फ़ीसदी हिस्सा चला गया है. शरीर के फ़ैट्स के बाद अब मसल्स (मांसपेशियां) भी जा चुके हैं. इसके बाद अंदरूनी ऑर्गन जाएंगे और आख़िर में दिमाग़. लेकिन अभी वो नौबत नहीं आई है. आज 20वां दिन ख़त्म हो रहा है और मैं साबित कर सकता हूं कि मेरा दिमाग़ बिल्कुल ठीक काम कर रहा है.”
“यहां बहुत से लोग पूछते हैं कि आंदोलन की वजह से क्या केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा होगा या कोई जवाबदेही तय होगी? मैं आपसे पूछता हूं, भारत की जनता को अपने बच्चों की जान और शिक्षा ज़्यादा प्यारी है या प्याज़? भारत में जनता के आंदोलन की ताक़त से तीन बार सरकारें गिरी हैं. 1980 में केंद्र सरकार गिरी, 1998 में दिल्ली और राजस्थान की सरकारें गिरीं, वो आंदोलन सिर्फ़ प्याज़ की क़ीमतों को लेकर था.”
वांगचुक ने कहा कि इस बार मुद्दा प्याज़ नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य और जीवन का है. उन्होंने दावा किया कि इस साल नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के कारण 20 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की है. उन्होंने सवाल किया कि क्या इस मुद्दे पर भी शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं होना चाहिए. उन्होंने लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित शांतिपूर्ण संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की.
वांगचुक ने कहा, “20 जुलाई को मेरे साथ संसद की ओर मार्च कीजिए. हमारी असली ताक़त आपकी संख्या है. मैं अकेला, भूखा और एक साधारण इंसान हूं. ताक़त आप लोगों की है. हम सिर्फ़ छात्रों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.”


