Saturday, July 4, 2026

विवादों में घिरा JPSC 2026 पीटी रिजल्ट, सदस्यों के हस्ताक्षर और कटऑफ जारी नहीं होने पर उठे सवाल

रांची : बीते 2 जुलाई को जेपीएससी की ओर से जारी 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा (पीटी)-2025 का रिजल्ट अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है क्योंकि जेपीएससी ने 2,204 अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े इस रिजल्ट पर आयोग के किसी भी सदस्य के हस्ताक्षर ही मौजूद नहीं हैं. ऐसे में इस रिजल्ट की वैधानिकता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वर्तमान में आयोग में तीन सदस्य हैं लेकिन इन तीनों ही सदस्यों में से किसी के हस्ताक्षर नहीं हैं. बताया जा रहा है कि आयोग के तीनों सदस्य रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी के कामकाज से संतुष्ट नहीं थे, जिसके कारण सदस्यों ने रिजल्ट पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया.

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कोर्ट के आदेश पर रिजल्ट

इस मामले में याचिका दायर होने के बाद हाईकोर्ट ने 30 जून को परिणाम जारी करने का निर्देश दिया था. अदालत के आदेश के अनुपालन में आयोग ने गुरुवार रात परिणाम घोषित कर दिया. साथ ही मुख्य परीक्षा का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया. मुख्य परीक्षा के लिए 3 से 9 जुलाई तक आवेदन लिए जाएंगे, जबकि परीक्षा 18, 19 और 20 जुलाई को आयोजित होगी.

कट ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं

रिजल्ट के साथ इस बार कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. इससे अभ्यर्थियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि चयन किस आधार पर किया गया. पिछले वर्षों में परिणाम के साथ कटऑफ भी जारी किया जाता रहा है, जिससे चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी मानी जाती थी. पिछली संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा में अनारक्षित, पिछड़ा वर्ग-1, पिछड़ा वर्ग-2 और ईडब्ल्यूएस वर्ग का कटऑफ 246 अंक था, जबकि एससी और एसटी वर्ग का कटऑफ 236 अंक निर्धारित किया गया था. वहीं 7वीं से 10वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में सामान्य वर्ग का कटऑफ 260, पिछड़ा वर्ग का 252, एससी का 238 और एसटी का 230 अंक रहा था.

पूर्व सदस्य ने उठाए सवाल

जेपीएससी के पूर्व सदस्य दुखी उरांव ने भी परिणाम की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि आयोग के किसी भी आधिकारिक परिणाम पर सदस्यों के हस्ताक्षर होना आवश्यक है. कम से कम कोरम पूरा करने लायक सदस्यों की स्वीकृति जरूरी होती है. यदि किसी सदस्य ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं तो परिणाम की वैधानिक स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है. रिजल्ट जारी होने के साथ ही मुख्य परीक्षा की तिथियां भी घोषित कर दी गई हैं.

अभ्यर्थियों की आपत्तियां

अभ्यर्थियों का कहना है कि आवेदन भरने और आवश्यक दस्तावेज तैयार करने के लिए केवल सात दिन का समय दिया गया है. जाति, आय, क्रीमीलेयर, दिव्यांगता समेत अन्य प्रमाणपत्र इतने कम समय में बनवाना आसान नहीं है. वहीं 18 जुलाई से परीक्षा शुरू होने के कारण तैयारी के लिए भी पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है. इससे अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ गया है.

418 अभ्यर्थी हरियाणा और उत्तर प्रदेश के

सूत्रों के अनुसार, 50 अनारक्षित पदों के लिए 1,122 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चुना गया है. इनमें 418 अभ्यर्थी हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बताए जा रहे हैं. इसी के साथ कटऑफ सार्वजनिक नहीं किए जाने और चयन प्रक्रिया पर उठे सवालों ने विवाद को और गहरा कर दिया है.

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