रांची: झारखंड में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम को लेकर चुनाव आयोग ने कमर कस ली है। इसी सिलसिले में झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को एक महत्वपूर्ण पत्र जारी कर एसआईआर प्रक्रिया में तैनात वोलेंटियर्स (विशेषकर शिक्षकों) के कार्यों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया है।
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हाल ही में मीडिया और विभिन्न माध्यमों से यह बात सामने आई थी कि वोलेंटियर के रूप में चयनित शिक्षकों को शिक्षण कार्यों के साथ-साथ मतदाता सूची पुनरीक्षण के कार्यों में बीएलओ का सहयोग करने में काफी व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षण कार्य जरूरी, लेकिन मताधिकार से कोई वंचित न रहे: CEO
इस मामले पर संज्ञान लेते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा, “शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों का शिक्षण एक अति महत्वपूर्ण विषय है। इसी वजह से निर्वाचन के कार्यों में पहले से ही कम से कम शिक्षकों को शामिल किया गया है। लेकिन चूंकि निर्वाचन सेवा के पदाधिकारियों और कर्मियों की संख्या बेहद सीमित होती है, इसलिए चुनाव से जुड़े कार्यों के लिए अन्य सेवाओं के कर्मियों की प्रतिनियुक्ति अनिवार्य हो जाती है।”
उन्होंने आगे कहा कि बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ भारत के प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदाता सूची से जोड़ना भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है, ताकि कोई भी अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
पहचान दस्तावेजों की कमी के कारण छूटे प्रवासी मजदूर
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने अपने हालिया क्षेत्रीय दौरों का हवाला देते हुए एक बड़ी चिंता साझा की। उन्होंने बताया कि कई पात्र नागरिक, विशेष रूप से प्रवासी मजदूर, पहचान दस्तावेजों (जैसे आधिकारिक पहचान पत्र आदि) की कमी के कारण अब तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं।
CEO ने नियमों को किया स्पष्ट
के. रवि कुमार ने साफ किया कि भारत का मतदाता बनने के लिए केवल भारतीय नागरिक होना, 18 वर्ष की आयु पूरी करना और संबंधित मतदान क्षेत्र का सामान्य निवासी होना पर्याप्त है। इसके लिए कई तरह के अन्य दस्तावेज भी मान्य हैं। यदि किसी के पास पारंपरिक दस्तावेज नहीं हैं, तो विशेष मामलों में ईआरओ और एईआरओ द्वारा सुनवाई कर के भी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है।
तोरपा और रांची का दौरे का दिया उधाहरण
सीईओ ने अपने फील्ड दौरों के जमीनी अनुभवों को साझा करते हुए बताया:
तोरपा दौरा (30 जून 2026): तोरपा के दो मतदान केंद्रों पर बीएलओ-बीएलए2 बैठक के दौरान पता चला कि जनजातीय समुदाय के तीन ऐसे नागरिक हैं जिनकी उम्र 40 वर्ष से अधिक हो चुकी है, लेकिन पहचान दस्तावेज न होने से वे आज तक वोटर नहीं बन पाए। ये लोग पूर्व में पहचान पत्र/कार्ड बनने के शिविरों के दौरान झारखंड से बाहर ईंट भट्ठों पर या पंजाब में कृषि मजदूर के रूप में काम कर रहे थे।
रांची दौरा (13 जून 2026): रांची के रातू रोड में सीईओ की मुलाकात करीब 40 वर्ष के एक व्यक्ति से हुई, जिसका नाम न तो वर्ष 2003 की सूची में था और न ही वर्तमान 2026 की मतदाता सूची में शामिल है।
सीईओ द्वारा फील्ड दौरे के बाद वोलेंटियर्स को निर्देश दिया गया है कि वे चुनाव पाठशाला और बीएलओ बैठकों में ऐसे मामलों को प्रमुखता से उठाएं, इन्हें बैठक रजिस्टर में दर्ज करें और संबंधित एईआरओ को रिपोर्ट कर उन्हें तुरंत वोटर बनाने में मदद करें।
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जिलावार SIR रिपोर्ट और लिस्ट



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वोलेंटियर्स के लिए जारी 6 बड़े दिशा-निर्देश
1. अनमैप्ड मतदाताओं की पहचान और सहायता: वोलेंटियर्स अपने बीएलओ से अनमैप्ड मतदाताओं की सूची लेंगे (जिसमें से मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और हस्ताक्षर से इनकार करने वाले मतदाताओं को हटा दिया गया हो)। वोलेंटियर्स इन बचे हुए नागरिकों का नाम ऑनलाइन पोर्टल (www.voters.eci.gov.in या ECINET) पर खोजेंगे और मैपिंग तथा इन्यूमरेशन फॉर्म भरने में उनकी मदद करेंगे। 1 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं का फॉर्म-6 भरवाना भी उनकी जिम्मेदारी होगी।
2. बीएलओ बैठक की कार्यवाही का डॉक्यूमेंटेशन: कुछ बीएलओ लिखने के कार्य में कुशल नहीं हैं। ऐसे में वोलेंटियर्स एसआईआर प्रक्रिया और एएसडीडी सूची को अंतिम रूप देने के लिए आयोजित सभी बीएलओ-बीएलए2 बैठकों की कार्यवाही को खुद रिकॉर्ड और सुव्यवस्थित करेंगे।
3. मतदाता जागरूकता फैलाना: निर्वाचन आयोग द्वारा उपलब्ध कराई गई जागरूकता सामग्रियों, पोस्टरों (पोस्टर 1 से 4) और पर्चों के माध्यम से वोलेंटियर्स आम जनता और पात्र मतदाताओं के बीच सक्रिय रूप से जागरूकता फैलाएंगे।
4. बीएलओ पर दबाव या तकनीकी समस्या की रिपोर्टिंग: यदि किसी बीएलओ पर किसी हितधारक द्वारा अपात्र व्यक्ति का नाम जोड़ने के लिए अनुचित दबाव बनाया जा रहा हो, धमकी दी जा रही हो या बीएलओ के स्वास्थ्य/पारिवारिक कारणों से काम प्रभावित हो रहा हो, तो वोलेंटियर इसकी तुरंत जानकारी एईआरओ/ईआरओ या जिला निर्वाचन पदाधिकारी ( DEO ) को देंगे।
5. बीएलओ ऐप (BLO App) के संचालन पर सख्त रोक: दिशा-निर्देशों में साफ किया गया है कि वोलेंटियर्स बीएलओ ऐप में कभी भी खुद डेटा प्रविष्टि या संचालन नहीं करेंगे। यदि ऐप धीमा चल रहा है या बीएलओ ऐप चलाने में असमर्थ है, तो इसकी सूचना अधिकारियों को दी जाएगी। अधिकारी इसके लिए कंप्यूटर ऑपरेटर या सुपरवाइजर तैनात करेंगे।
6. फर्जी पंजीकरण के प्रयासों पर पैनी नजर: यदि कोई अपात्र व्यक्ति झूठी घोषणा या फर्जी दस्तावेज जमा करके मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का संदिग्ध प्रयास करता है, तो वोलेंटियर्स तुरंत इसकी रिपोर्ट एईआरओ/ईआरओ को करेंगे, ताकि दोषी व्यक्ति के खिलाफ मौजूदा कानूनों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
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