रांची: झारखंड के के 4 नवनियुक्त सूचना आयुक्तों ने आज लोकभवन ( पूर्व में राजभवन ) के दरबार हॉल में आयोजित सपथ ग्रहण समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ ली। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सभी नवनियुक्त आयुक्तों को पद की शपथ दिलाई।
Highlights:
इस शपथ ग्रहण के साथ ही करीब 5 साल से ठप पड़ा झारखंड राज्य सूचना आयोग एक बार फिर पूरी तरह से कार्यशील हो गया है। आयोग के दोबारा एक्टिव होने से राज्य में सूचना के अधिकार ( RTI ) के तहत लंबित पड़े हजारों मामलों के त्वरित निष्पादन की उम्मीद जगी है।
सीएम हेमंत सोरेन समेत कई मंत्री रहे उपस्थित

इस सपथ ग्रहण कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी उपस्थित रहे। सपथ ग्रहण के बाद सीएम ने सभी नवनियुक्त सूचना आयुक्तों को बधाई दी। इसके साथ ही उन्होनें सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा: “विश्वास है कि आप सभी पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित के मूल्यों को और सुदृढ़ करते हुए अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।”
वहीं मौके पर केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ, राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, राज्यसभा सदस्य महुआ मांजी और बैद्यनाथ राम भी उपस्थित रहे।
इन 4 सूचना आयुक्तों ने ली शपथ
शपथ लेने वाले चारों नवनियुक्त सूचना आयुक्त अपने-अपने क्षेत्रों के नामचीन चेहरे हैं। इनमें पत्रकारिता से लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की पृष्ठभूमि वाले लोग शामिल हैं:

- अनुज कुमार सिन्हा: पत्रकार और लेखक।
- तनुज खत्री: झारखंड मुक्ति मोर्चा ( JMM ) के पूर्व केंद्रीय प्रवक्ता।
- शिवपूजन पाठक: भारतीय जनता पार्टी ( BJP ) के पूर्व प्रदेश मीडिया प्रभारी।
- अमूल्य नीरज खलखो: कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव।
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सियासी खींचतान और दो बार फाइल लौटने के बाद मिली मंजूरी
इन नियुक्तियों का सफर आसान नहीं रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 25 मार्च को हुई उच्चस्तरीय चयन समिति की बैठक में इन चार नामों पर मुहर लगी थी, जिसके बाद फाइल राजभवन भेजी गई थी। लेकिन राजभवन और सरकार के बीच फाइल को लेकर दो बार पेंच फंसा:
पहली आपत्ति ( 1 अप्रैल ): राज्यपाल ने उम्मीदवारों की राजनीतिक पृष्ठभूमि, उनकी निष्पक्षता और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए पहली बार फाइल सरकार को लौटा दी थी। राजभवन ने पूछा था कि इस अर्ध-न्यायिक संस्था के लिए स्वतंत्रता का परीक्षण कैसे किया गया?
सरकार का जवाब: राज्य सरकार ने दलील दी कि चयन समिति ने आरटीआई अधिनियम ( RTI Act ) के सभी प्रावधानों के अनुरूप और विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाई है।
दूसरी और तीसरी कोशिश: राजभवन ने कुछ और बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए दूसरी बार भी फाइल वापस कर दी। हालांकि, जब सरकार ने तीसरी बार उन्हीं नामों की फाइल दोबारा भेजी, तो राजभवन ने इस पर अपनी अंतिम मंजूरी दे दी।
इसके बाद राज्य सरकार ने 10 जून को राज्यपाल की सशर्त स्वीकृति मिलने के बाद इन नियुक्तियों से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी की थी।
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6 साल से खाली था पद, 300 आवेदनों में से हुआ चयन
मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल नवंबर 2019 में ही समाप्त हो गया था। इसके बाद एकमात्र बचे सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी को कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त बनाया गया, लेकिन 8 मई 2020 को उनका भी कार्यकाल खत्म हो गया। तब से यह आयोग पूरी तरह निष्क्रिय था। इस कारण झारखंड सूचना आयोग में लंबे समय से पदों के खाली रहने के कारण आरटीआई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी।
जिसके बाद झारखंड हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और लगातार दबाव के बाद इस नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आई थी।
बताते चलें कि इन पदों के लिए भारी होड़ थी। मुख्य सूचना आयुक्त पद के लिए 35 से अधिक और सूचना आयुक्तों के पदों के लिए करीब 300 आवेदन चयन समिति के पास आए थे। हालांकि, अभी भी मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर अंतिम नियुक्ति होना बाकी है।
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