कोलकाता: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के बाद राज्य में जारी राजनीतिक हलचल के बीच कलकत्ता हाई कोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस ( TMC ) के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर की जा रही अंडे फेंकने और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की घटनाओं पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
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ममता बनर्जी के करीबी व वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है।
TMC के बड़े नेताओं को बनाया गया निशाना
सुनवाई के बाद टीएमसी सांसद और सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने मीडिया को बताया कि राज्य में चुनाव के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेताओं पर लगातार हमले और अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है।
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याचिका में आरोप लगाया गया है कि टीएमसी के सबसे बड़े नेताओं में शुमार अभिषेक बनर्जी, कुणाल घोष, सौगत रॉय और कई अन्य कार्यकर्ताओं पर सार्वजनिक रूप से अंडे फेंके गए।
टीएमसी का दावा है कि गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों को रस्सी से बांधकर सड़कों पर घुमाया जा रहा है और भीड़ हिंसा का खतरा लगातार मंडरा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये सारी अपमानजनक घटनाएं पुलिस की मौजूदगी में हो रही हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।
‘कानून के शासन के लिए यह चिंताजनक’- हाई कोर्ट
कल्याण बनर्जी के अनुसार, इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय अदालत ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने सीधे तौर पर सवाल किया: “आखिर पुलिस इस तरह के माहौल में अपनी जिम्मेदारी निभाने में क्यों विफल साबित हो रही है? अगर ऐसा ही चलता रहा, तो समाज में कानून के प्रति जागरूकता कैसे विकसित होगी?”
शुभेंदु अधिकारी और अग्निमित्र पॉल पर संस्कृति बिगाड़ने का आरोप
टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने इस तरह की हिंसक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विपक्ष के बड़े चेहरों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और राज्य सरकार की मंत्री अग्निमित्र पॉल जैसी राजनीतिक शख्सियतों के भड़काऊ बयानों के कारण ही राज्य में इस तरह की अलोकतांत्रिक संस्कृति को प्रोत्साहन मिल रहा है।
वहीं कल्याण बनर्जी ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। इन घटनाओं से न सिर्फ राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो रहा है, बल्कि आम नागरिकों में भी डर का माहौल बन गया है। जब गिरफ्तार लोगों को सार्वजनिक रूप से बेइज्जत किया जाता है, तो कानून की गरिमा तार-तार होती है।
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2026 चुनाव के बाद बदला बंगाल का सियासी समीकरण
साल 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद से ही टीएमसी इन घटनाओं को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ और लक्षित हमला बता रही है। तृणमूल कांग्रेस की मांग है कि राज्य में सभी राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं को समान सुरक्षा मिलनी चाहिए। अब देखना यह होगा कि कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद राज्य सरकार इस मामले पर क्या रिपोर्ट सौंपती है और इन घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
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