भोपाल : मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव का समीकरण उस समय बदल गया, जब कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जांच के दौरान ख़ारिज कर दिया गया, जबकि बीजेपी के तीनों उम्मीदवार तरूण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट का नामांकन सही पाया गया. अब इन तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया है. चुनावी नियम के अनुसार, नामांकन जांच की प्रक्रिया के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर के फ़ैसले को चुनाव आयोग नहीं पलट सकता है.
Highlights:
इसे भी पढ़ें : बंगाल में पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन ने बेची प्री-दुर्गापूजा की अवैध टिकट, यूनेस्को का गलत इस्तेमाल
बीजेपी ने जताई थी आपत्ति
रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने बीजेपी की आपत्ति स्वीकार करते हुए मीनाक्षी नटराजन नामांकन रद्द कर दिया, जिससे एक सीट पाने की कोशिशों में शामिल कांग्रेस को बड़ झटका लगा. बीजेपी का आरोप था कि नटराजन ने तेलंगाना में लंबित एक मामले की जानकारी अपने नामांकन पत्र में नहीं दी थी. बीजेपी ने निर्वाचन अधिकारी के आगे मंगलवार की सुबह आपत्ति दर्ज कराई थी. बीजेपी का आरोप था कि नटराजन ने एक क़ानूनी मामले के बारे में नामांकन दस्तावेज़ों में जानकारी नहीं दी थी.
रिटर्निंग अधिकारी ने आदेश में क्या कहा
अपने आदेश में रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेज़ों की जांच के बाद यह पाया गया कि मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फ़ॉर्म 26 में “उक्त न्यायालय परिवाद का उल्लेख नहीं करके अपना शपथ पत्र अपूर्ण प्रस्तुत किया है.”
नामांकन निरस्तीकरण के आदेश के मुताबिक़, जिस मामले का ज़िक्र बीजेपी द्वारा शिकायत में किया गया है उसमें अदालत पहले ही संज्ञान ले चुकी है और नटराजन को पेश होने के लिए समन भी जारी किए जा चुके हैं इसलिए “मामला न्यायालय में चल रहा है यह सिद्ध पाया गया.” रिटर्निंग अधिकारी ने यह भी कहा कि नटराजन ने उस मामले में अदालत के सामने अपना जवाब भी दाखिल किया है, जिससे “उन्हें इस प्रकरण की पूर्ण जानकारी होना सिद्ध पाया गया है.”
आदेश में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत “अधूरा अपूर्ण एफिडेविट फॉर्म 26 रखा जाना तथा अभ्यर्थी द्वारा तथ्यों का छुपाया जाना” उनके खिलाफ सिद्ध पाया गया. अधिकारी के अनुसार, इससे मतदाताओं को उम्मीदवार के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल पाती. इसी आधार पर निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया.
कांग्रेस ने जताया विरोध
बीजेपी ने जहां इसे ‘सत्य की जीत’ बताया है, वहीं कांग्रेस ने इसे ‘सीट चोरी’ कहा है. कांग्रेस ने इस फ़ैसले को अवैध बताते हुए आरोप लगाया है कि बीजेपी ने पर्याप्त संख्या न होने के बावजूद तीसरी राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए साज़िश रची है.
इससे पहले नामांकन की अंतिम तारीख से ठीक पहले बीजेपी ने महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतारकर चौंका दिया था. 230 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के 164 विधायक हैं, जिससे वह दो सीटें आराम से जीत सकती है. एक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की ज़रूरत होती है. ऐसे में तीसरे उम्मीदवार की जीत अतिरिक्त वोटों, क्रॉस-वोटिंग या विपक्षी सदस्यों के मतदान से दूर रहने पर निर्भर थी.
फैसले पर मीनाक्षी नटराजन ने कहा
मीनाक्षी नटराजन ने पत्रकारों से कहा, “जब बीजेपी ने जीत के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा में ज़रूरी (58) वोट न होते हुए भी तीसरा उम्मीदवार उतारा तो वहीं से यह साफ़ हो गया था कि यह एक साज़िश है और बीजेपी सीट चोरी करना चाहती है. जैसे इन्होंने पिछले समय में चुनावों में हेरफेर की है वैसे ही इन्होंने इस बार राज्यसभा के चुनाव में किया.”
उन्होंने आगे कहा, “सबसे पहले उन्होंने एक कैंडिडेट उतारा, फिर जब उन्हें यह पता चला गया कि हम सब एक हैं और कोई अलगाव नहीं होगा यानी उनका तीसरा उम्मीदवार नहीं जीतेगा, क्यूंकि कांग्रेस एकजुट है तो उन्होंने एक नोटिस को आधार बनाया.”
“इस मामले में अभी किसी अदालत द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया गया है, बावजूद इसके यह नामांकन रद्द कर दिया गया. यह सिर्फ़ मेरे राज्यसभा नामांकन की बात नहीं है बल्कि हमारे देश के सामने यह एक गंभीर परिस्थिति है, सवाल है कि क्या भारत का लोकतंत्र बचेगा?”
चुनाव आयोग पहुंची कांग्रेस
भोपाल में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी रद्द होने के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश, भूपेश बघेल, सचिन पायलट और केसी वेणुगोपाल समेत कई पार्टी नेता नई दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ़्तर पहुंचे. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग के दफ़्तर के बाहर सुरक्षाकर्मियों से दरवाज़ा खोलने के लिए कहा. उनका कहना था कि वो अपनी याचिका देने के लिए आए हैं. इसके बाद पार्टी नेता कुछ समय के लिए वहीं धरने पर बैठ गए.
कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा कि धरने पर बैठने के बाद उनके पत्र को क्लर्क ने लिया. कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि जब तक उन्हें अंदर नहीं जाने दिया जाता तब तक वो धरने पर बैठेंगे. हालांकि बाद में उन्होंने बताया कि शाम 7.25 बजे चुनाव आयोग ने उनका पत्र ले लिया था. केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग के दफ़्तर जाते हुए पत्रकारों से नामांकन रद्द होने को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की हत्या हो गई है.
वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन ख़ारिज किए जाने पर कहा, “कांग्रेस पार्टी इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ पूरी ताक़त से लड़ेगी.” उन्होंने कहा, “इन घटनाओं से जुड़े कानूनी और चुनावी आरोपों को लेकर हमारे कानूनी विशेषज्ञों ने अपना पक्ष रखा था. जो कानूनी आधार हमने रखे, उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया गया. जो हुआ वह पूरी तरह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई है.”



