न्यूज डेस्क: सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके गठबंधन सरकार आज तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास मत का सामना करेगी। यह सिर्फ सरकार के बहुमत साबित करने का मामला नहीं है, बल्कि इससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव भी देखने को मिल सकता है। खासकर AIADMK के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और बागी विधायकों की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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विजय के इस्तीफे से एक सीट हुई कम
हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई थी। हालांकि सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 सीटों का आंकड़ा पार्टी अपने दम पर हासिल नहीं कर सकी। बाद में कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK और IUML के समर्थन से विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। विजय ने चुनाव दो सीटों से लड़ा था और जीत दर्ज की थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने तिरुचिरापल्ली पूर्व सीट से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद TVK की संख्या 108 से घटकर 107 हो गई। ऐसे में सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बहुमत के आंकड़े तक पहुंची है।
AIADMK के बागी विधायक बने चर्चा का केंद्र
राज्य की राजनीति में नया मोड़ तब आया जब AIADMK के कुछ बागी विधायकों ने विजय सरकार को समर्थन देने के संकेत दिए। इस गुट का नेतृत्व वरिष्ठ नेता सीवी शन्मुगम और एसपी वेलुमणि कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि उनके साथ करीब 30 विधायक हैं। मंगलवार को विजय खुद शन्मुगम के चेन्नई स्थित आवास पहुंचे थे, जिसके बाद बागी गुट ने सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया।
दल-बदल कानून ने बढ़ाई सियासी हलचल
तमिलनाडु में अब पूरा मामला दल-बदल कानून पर आकर टिक गया है। नियमों के मुताबिक यदि कोई विधायक पार्टी व्हिप के खिलाफ मतदान करता है, तो उसकी सदस्यता जा सकती है। हालांकि अगर किसी दल के दो-तिहाई विधायक एक साथ अलग होते हैं, तो उन्हें कानूनी सुरक्षा मिल सकती है। AIADMK के पास फिलहाल 47 विधायक हैं। ऐसे में बागी गुट को सुरक्षित रहने के लिए कम से कम 32 विधायकों का समर्थन चाहिए।
स्पीकर की भूमिका होगी अहम
विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर की भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। किसी भी दल-बदल याचिका पर फैसला लेने का अधिकार स्पीकर के पास होता है। ऐसे में फ्लोर टेस्ट के बाद उनकी भूमिका और ज्यादा अहम हो सकती है।
तमिलनाडु विधानसभा में यह पहली बार होगा जब विश्वास मत की पूरी प्रक्रिया का लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा। इससे राजनीतिक हलचल और जनता की दिलचस्पी दोनों बढ़ गई हैं। विधानसभा के पहले दिन अस्थायी स्पीकर की नियुक्ति हुई थी, दूसरे दिन स्थायी स्पीकर और उपाध्यक्ष का चुनाव हुआ और आज विश्वास मत पर मतदान होना है।
विजय के एक विधायक नहीं कर पाएंगे मतदान
इस बीच विजय सरकार को एक झटका भी लगा है। TVK विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति फ्लोर टेस्ट में मतदान नहीं कर पाएंगे। मद्रास हाई कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में उन्हें वोटिंग से दूर रहने का निर्देश दिया है। यह मामला उनके चुनाव परिणाम को लेकर दायर याचिका से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि अगर उनका वोट निर्णायक साबित होता है, तो इसका असर राज्य की संवैधानिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उनका चुनाव फिलहाल अमान्य नहीं माना जाएगा।
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क्या होता है फ्लोर टेस्ट?
फ्लोर टेस्ट वह प्रक्रिया होती है, जिसमें मुख्यमंत्री को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना पड़ता है। इसमें विधायक सदन में उपस्थित होकर मतदान करते हैं। यह प्रक्रिया विधानसभा अध्यक्ष की निगरानी में होती है। यदि सरकार बहुमत साबित करने में असफल रहती है, तो राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत सरकार को बर्खास्त करने और राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं।




