Thursday, July 23, 2026

राँची के रातू में लोक-लाज के नाम पर 13 वर्षीय नाबालिग की हत्या, एम्बुलेंस से बिहार ले जाकर जलाया शव, बाप-बेटा गिरफ्तार

राँची: झारखंड की राजधानी रांची के रातू थाना क्षेत्र स्थित झकराटांड़ से एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। झकराटांड़ में पिछले 8 सालों से रह रही गोद ली हुई 13 वर्षीय राजनंदनी को उसी घर के लोगों ने अपनी झूठी शान की खातिर मौत के घाट उतार दिया। जिसके बाद सबूत मिटाने और शव को ठिकाने लागने के लिए एम्बुलेंस से बिहार के गया लेकर गए और वहाँ अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी राहुल पाठक और पुजारी पिता सुबोध पाठक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। साथ ही एम्बुलेंस ड्राइवर को भी पूछताछ के लिए हिरासत में रख एम्बुलेंस को जब्त कर लिया है।

ग्रामीणों के हंगामें के बाद खुला मामला

मामले का खुलासा 2 अप्रैल की रात को हुआ, जब झखड़ाटांड़ गांव के ग्रामीण अचानक सुबोध पाठक के घर के बाहर जमा हो गए। ग्रामीणों का सीधा सवाल था कि पिछले 8 साल से जो लड़की यहाँ रह रही थी, वो अचानक कहाँ गायब हो गई? जिसपर राहुल और सुबोध पाठक बार बार झूठी कहानी गढ़ने लगे। लेकिन ग्रामीणों का विरोध और सवाल जारी रहे और हंगामा और तेज हो गया। हंगामा बढ़ा तो रातू थाना पुलिस मौके पर पहुँची। शुरुआत में परिवार ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, जिसके बाद घर पर FSL टीम द्वारा भी जांच किया गया परंतु कुछ भी पता नहीं चला। लेकिन लोगों के भारी विरोध और संदेह गहराने पर लापता रहने से संबंधित रातू थाना कांड संख्या 111/26 (धारा 140(3) BNS) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

इंस्टाग्राम में दोस्ती बनी मौत का कारण

एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर बनी स्पेशल टीम ने जब आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की, तो हत्या की जो वजह सामने आई वह हैरान करने वाली थी। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने ये कबूला कि मृतका इंस्टाग्राम के जरिए आरोपी राहुल पाठक के साले से बातचीत करती थी। दोनों के बीच बढ़ती नजदीकी से सुबोध और राहुल पाठक को लगा कि उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हो रही है। जिसके बाद राहुल ने गुस्से से 13 मार्च की रात बच्ची के साथ जमकर मारपीट की, लेकिन इससे भी उसका गुस्सा शत नहीं हुआ। जिसके बाद उसने बच्ची का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

एम्बुलेंस से बिहार ले जाकर जलाया शव

हत्या के बाद राहुल ने अपने पिता सुबोध को फोन कर इसकी सूचना दी। सुबोध ने घर वापस आकर अपने करीबी और कमलेश मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक डॉ. अमरेश पाठक को फोन कर घर बुलाया। डॉक्टर ने घर आकर बच्ची कि जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। आरोपियों के करीबी होने के कारण डॉक्टर ने बचने के लिए आरोपियों से शव को ठिकान लगाने की सलाह दी। इसके साथ ही अपने अस्पताल का एम्बुलेंस भी बुलवाया। आरोपियों ने एम्बुलेंस (JH-01-AA-1245) के चालक पिंटू कुमार सिंह को बताया कि उनकी 13 साल की बेटी की बीमारी से मौत हो गई है। चालक को गुमराह कर शव को बिहार के गया ले जाया गया। वहां आनन-फानन में नाबालिग का अंतिम संस्कार कर दिया गया ताकि कोई सबूत बाकी न रहे। हत्या के बाद पूरा आरोपी परिवार तीन दिनों तक गायब रहने के बाद वापस लौटा।

पंडित बुलाकर कराया गरुड़ पुराण का पाठ 

शव का अंतिम संस्कार करने के तीन दिन बाद जब वापस लौटा तो बच्ची की आत्मा कि शांति के लिए बनारस से पंडित बुलाकर अपने घर पर गरुड़ पुराण का पाठ करया ताकि किसी को शक न हो सके।

कौन और कहां है बच्ची का असली परिवार?

मामले की जांच में मृत बच्ची राजनंदिनी की पारिवारिक पृष्टभूमि से जुड़ी जानकारी सामने आयी है। मिली जानकारी के अनुसार राजनंदिनी मूल रूप से औरंगाबाद जिले के अंबा गांव निवासी दिनेश मइवार की दूसरी पत्नी की पुत्री थी। दिनेश मइवार शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं तथा उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर है। इसी परिस्थिति को देखते हुए परिवार के परिचित रातू निवासी सुबोध पाठक राजनंदिनी को अपने साथ ले आये थे, ताकि उसका बेहतर पालन-पोषण हो सके। पिछले करीब आठ वर्षों से राजनंदिनी सुबोध पाठक के घर में रह रही थी और उन्हें फूफा कहकर संबोधित
करती थी। बताया जाता है कि सुबोध पाठक ने राजनंदिनी के आधार कार्ड में भी पिता के स्थान पर अपना नाम दर्ज करा रखा था। धीरे-धीरे राजनंदिनी ने पाठक परिवार को ही अपना असली परिवार मान लिया था। लेकिन पाठक परिवार ने काभी उसे अपने परिवार का हिस्सा नहीं समझा और इस अमानवीय अपराध को अंजाम दिया।

CCTV और तकनीकी साक्ष्यों से हुई पुष्टि

पुलिस को टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्य मिले, जिनसे एम्बुलेंस की आवाजाही की पुष्टि हो गई। कड़ी पूछताछ में बाप-बेटे टूट गए और अपना जुर्म कबूल कर लिया। जिसके बाद मुख्य आरोपी सुबोध पाठक और राहुल पाठक को पुलिस ने जेल भेज दिया है। वहीं पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल एम्बुलेंस और दो मोबाइल फोन जब्त किया है। वहीं कमलेश मेमोरियल हॉस्पिटल का संचालक डॉ. अमरेश पाठक फरार है और पुलिस उसके खोजबीन में जुटी है।

सवाल आज भी वही है…

यह घटना समाज के उस काले चेहरे को उजागर करती है जहाँ आज भी सोशल मीडिया पर बात करना या किसी से दोस्ती करना मौत की सजा बन जाता है। जिस मासूम ने 8 साल उस परिवार को दिए, उसी परिवार ने लोक-लाज के नाम पर उसे बेदर्दी से मौत की नींद सुला दिया।

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