रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच CBI को सौंपने का ऐतिहासिक आदेश दिया है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि ED अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई में असामान्य जल्दबाजी दिखाई गई।
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क्या है पूरा मामला?
उल्लेखनीय है कि 23 करोड़ रुपये के पेयजल घोटाले में आगे की जांच के लिए ईडी ने संतोष कुमार को समन भेजा था। लेकिन उसने पूछताछ के लिए हाजिर होने के बदले ईडी को मेल भेज कर यह सूचित किया था कि वह बीमार है और उसका इलाज चल रहा है। इसके बाद अचानक वह ईडी के दफ्तर पहुंच कर अपना बयान दर्ज कराने की बात कही। ईडी ने इसे स्वीकार कर लिया और उससे पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान उसने पानी का जग उठा कर अपने सिर पर मार लिया। इसके बाद उसे सदर अस्पताल ले जाया गया। वहां उसने खुद ही अपने सिर में चोट लगाने की बात स्वीकार की। मेडिकल जांच के बाद डॉक्टर ने उसे फिट घोषित किया।
इस घटना के बाद उसने 13 जनवरी को ईडी के अधिकारी पर मारपीट का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाने में प्राथमिकी (FIR 5/2026) दर्ज करायी। प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस अधिकारियों के दल भारी पुलिस बल के साथ 15 जनवरी की सुबह ईडी के ऑफिस पहुंचा। पुलिस ने ईडी कार्यालय को क्राइम सीन की तरह ट्रीट किया।
ED ने दायर की थी याचिका
ईडी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर संतोष कुमार द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी की सीबीआई जांच का अनुरोध किया। याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से ईडी की याचिका पर सुनवाई को सक्षम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए सुनवाई से मुकर जाने का अनुरोध किया गया। लेकिन हाईकोर्ट के रोस्टर में संबंधित मामले की सुनवाई का अधिकार होने की वजह से सरकार के अनुरोध को खारिज करते हुए मामले की सुनवाई की गयी। जिसके बाद न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पुलिसिया कार्रवाई पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह पूरी घटना संदेहास्पद परिस्थितियों से घिरी हुई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति ने ED अधिकारी पर आरोप लगाया, वह खुद पेयजल घोटाले का मुख्य अभियुक्त है। पुलिस ने इस व्यक्ति (संतोष कुमार) के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज की है। कोर्ट ने कहा कि प्रभावशाली लोगों और राजनीतिज्ञों से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रहे ED अधिकारी के खिलाफ पुलिस ने बिना गहराई से जांच किए तुरंत कार्रवाई की। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 15 जनवरी की सुबह भारी पुलिस बल के साथ ED दफ्तर पहुँचना और उसे क्राइम सीन की तरह ट्रीट करना असामान्य था।
CBI को सौंपी गई जांच
न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पेयजल घोटाले के अभियुक्त द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी पर पुलिस ने कार्रवाई करने में जल्दबाजी दिखायी है। पहली नजर में ऐसा लगता है कि पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई की। मामले में असाधारण परिस्थितियों के मद्देनजर इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसलिए एयरपोर्ट थाने में दर्ज प्राथमिकी की जांच सीबीआई को सौंपी जाती है। न्यायालय ने सीबीआई निदेशक को मामले में प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार, जांच करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने एयरपोर्ट के थाना प्रभारी को मामले से संबंधित सभी दस्तावेज सीबीआई के हवाले करने का भी आदेश दिया है।


