चतरा: झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया में हुए एयर एंबुलेंस हादसे की गुत्थी सुलझाने के लिए जांच एजेंसियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। रेड बर्ड एयरवेज के विमान हादसे की उच्चस्तरीय जांच अब अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। घटनास्थल पर घंटों की मशक्कत और साक्ष्यों के संकलन के बाद, केंद्रीय जांच टीमें विमान का मलबा समेट कर जांच के लिए रवाना हो गई हैं।
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जांच के घेरे में तकनीकी पहलू
इस भीषण हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की दो सबसे बड़ी विमानन इकाइयां इसकी तह तक जाने में जुटी हैं। DGCA (नागर विमानन महानिदेशालय) की टीम मुख्य रूप से सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और तकनीकी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है। वहीं AAIB (विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो) के विशेषज्ञों ने मलबे के बिखराव के पैटर्न, इंजन के अवशेषों और विमान के संचार उपकरणों का बारीक विश्लेषण किया है।
जांच एजेंसियां (AAIB और DGCA) फिलहाल इन तीन संभावित कारणों पर काम कर रही हैं:
1. इंजन फेलियर- क्या उड़ान के दौरान इंजन ने काम करना बंद कर दिया था?
2. विजुअलिटी (दृश्यता)- 23 फरवरी की शाम क्या कोहरा या कम रोशनी हादसे की वजह बनी?
3. रखरखाव (Maintenance)- क्या विमान को उड़ान भरने के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट सही तरीके से दिया गया था?
संभवतः जांच के बाद घटना के प्रमुख कारणों का पता चल जाएगा।
जांच से चलेगा कारणों का पता
हादसे वाली जगह से सारा मलबा हटा लिया गया है और साक्ष्य जमा कर लिए गए हैं। जांच टीम अपने साथ विमान के अवशेष लेकर विशेष प्रयोगशाला के लिए रवाना हो चुकी है। अब लैब में मलबे का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जाएगा। विशेषज्ञों की कोशिश यह पता लगाने की है कि क्या आसमान में उड़ते वक्त विमान में कोई यांत्रिक खराबी आई थी, या फिर खराब मौसम और मानवीय चूक ने सात जिंदगियों को लील लिया। अब सबकी नजरें अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह साफ करेगी कि आखिर उस शाम आसमान में ऐसा क्या हुआ था जिसने एक सुरक्षित माने जाने वाले विमान को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया।
रेड बर्ड एयरवेज का सेफ्टी रिकॉर्ड
रेड बर्ड एयरवेज हाल के दिनों में अपने खराब सुरक्षा रिकॉर्ड के कारण नागरिक उड्डयन मंत्रालय के रडार पर रहा है। पिछले कुछ महीनों में रेड बर्ड के विमानों के साथ कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं और इमरजेंसी लैंडिंग की घटनाएं हुई हैं। बार-बार हो रहे हादसों के कारण DGCA ने पहले भी इसके ऑपरेशंस पर अस्थायी रोक लगाई थी और मेंटेनेंस ऑडिट के आदेश दिए थे। यह कंपनी मुख्य रूप से एक फ्लाइट ट्रेनिंग एकेडमी है, लेकिन इसके चार्टर्ड और एयर एंबुलेंस सेवाओं में सुरक्षा मानकों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।


