कोडरमा: झारखंड के कोडरमा जिले के जयनगर थाना क्षेत्र से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां बिरहोर समुदाय के दस बच्चे पिछले छह दिनों से लापता हैं। बच्चों के अचानक गायब होने से उनके परिजनों में दहशत और अनिश्चितता का माहौल है। मामले के तूल पकड़ने के बाद अब पुलिस प्रशासन हरकत में आया है और विशेष टीम गठित कर तलाश शुरू कर दी गई है।
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1 फरवरी से लापता हैं बच्चे
जयनगर थाना क्षेत्र के गड़ियाई बिरहोर टोला से 1 फरवरी को दस बच्चे घर से निकले थे। परिजनों के अनुसार, सभी बच्चों ने परसाबाद में भोज खाने जाने की बात कही थी, लेकिन इसके बाद वे वापस नहीं लौटे। बच्चों के देर तक नहीं आने पर परिजनों ने अपने स्तर से खोजबीन की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। लापता बच्चों में निशा कुमारी (7), रमेश बिरहोर (5), सजनी बिरहोर (8), बिरजू बिरहोर, मिथुन बिरहोर, शिवानी बिरहोर, कल्पना बिरहोर, रेखा बिरहोर (8), अनीशा बिरहोर (6) और एक अन्य बच्चा शामिल है। सभी बच्चे बिरहोर समुदाय से हैं।
मुखिया ने दी थी समय पर सूचना
बच्चों के नहीं लौटने पर 3 फरवरी को परिजन स्थानीय मुखिया राजेंद्र यादव के पास पहुंचे। मुखिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत इसकी सूचना जयनगर थाना प्रभारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को दी। हालांकि, आरोप है कि शुरुआती स्तर पर पुलिस और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। जब 5 फरवरी तक भी बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला, तब शुक्रवार को परिजन जयनगर थाना पहुंचे और बच्चों की तलाश की मांग की। इसके बाद मामला वरीय अधिकारियों तक पहुंचा। कोडरमा एसपी अनुदीप सिंह ने स्थिति को गंभीर मानते हुए विशेष जांच टीम के गठन का आदेश दिया।
गांव पहुंची जांच टीम
शुक्रवार को प्रशिक्षु डीएसपी दिवाकर कुमार के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम गड़ियाई बिरहोर टोला पहुंची। टीम में इंस्पेक्टर सुजीत कुमार, तिलैया थाना प्रभारी विनय कुमार, चंदवारा थाना प्रभारी शशिभूषण कुमार, जयनगर थाना प्रभारी उमानाथ सिंह, महिला थाना प्रभारी हेमा कुमारी, तिलैया डैम ओपी प्रभारी और टेक्निकल सेल के सदस्य शामिल थे। टीम ने परिजनों से पूछताछ की और गांव में छानबीन की। प्रशिक्षु डीएसपी दिवाकर कुमार ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बच्चों को जल्द खोज निकालने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है।
संवेदनहीनता के आरोप
स्थानीय मुखिया राजेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि शुरुआती दौर में अधिकारियों ने यह कहकर मामला टाल दिया कि बिरहोर समुदाय के लोग घुमक्कड़ होते हैं और बच्चे खुद लौट आएंगे। मुखिया का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन सक्रिय होता, तो बच्चों का जल्द पता चल सकता था। इस मामले ने पुलिस और प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार छह दिन बीत जाने के बावजूद बच्चों का कोई सुराग नहीं मिलने से बिरहोर परिवार गहरे सदमे में हैं। वे प्रशासन से जल्द से जल्द बच्चों को सुरक्षित बरामद करने की मांग कर रहे हैं।


