Tuesday, November 3, 2026

महिलाओं को गर्भवती होने के लिए कोई मजबूर नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट

एयरनाउ  डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि किसी भी महिला को चाहे बालिग हो या नाबालिग , उनको गर्भ पूरा करने के लिए फोर्स नहीं किया जायेगा। इसके अलावा कोर्ट ने ये भी निर्देश दिए कि महिलाओं को 30 हफ्ते की प्रेग्नेंसी ख़त्म करने की भी अनुमति होगी अगर वो ऐसा करना चाहे तो। जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस BV नागरत्ता की पीठ ने ये फैसला सुनाया।

बता दें कि ये फैसला 17 साल की उम्र में प्रेगनेंट हुई एक नाबालिग लड़की से जुड़े मामले में सामने आई है। जिस लड़की के केस से जुड़े मामले में ये सुनवाई हुई वो अब बालिग हो चुकी है।  कोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि ऐसे सब मामलों में लड़की की स्थिति और लड़की के हालात देखने ज़रूरी होते हैं। कोर्ट ने कहा कि ये बाद की बात है कि ये संबंध सहमति से बना या मजबूरी में, उससे ज़रूरी है कि लड़की अगर नहीं चाहती मां बनना उस वक्त तो कोई फोर्स नहीं कर सकता।  कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी कहा कि लड़की की पसंद और मर्जी इसमें बहुत जरूरी है। अदालत किसी महिला को जबरदस्ती मां बनने के फैसले को सपोर्ट नहीं कर सकता।

हालांकि ये फैसला आसान नहीं है, अगर 24 हफ्ते  भी एक लड़की गर्भपात कर सकती है तो फिर 30 हफ्ते बाद ये निर्णय क्यों नहीं ले सकती है। जबरदस्ती बच्चा जन्मे उससे अच्छा है कि अबॉर्शन कर ले।अदालत ने माना कि गर्भावस्था जारी रखना उसके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से गंभीर आघात का कारण बन सकता है और उसे सामाजिक कलंक का भी सामना करना पड़ सकता है.

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में गर्भ समाप्‍त करने की अनुमति देने पर किसी गंभीर जोखिम का संकेत नहीं था. इन परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गर्भ समाप्‍त करने की अनुमति देते हुए कहा कि युवती की ओर से लिखित सहमति दी जाएगी.

एयर नाऊ स्पेशल

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