Wednesday, July 22, 2026

राँची : संत जेवियर्स कॉलेज में आयोजित ‘क्रिसमस मिलन महोत्सव’ में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने लिया भाग

रांची : राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मंगलवार को संत जेवियर्स कॉलेज, राँची में आयोजित ‘क्रिसमस मिलन महोत्सव’ में भाग लेते हुए उपस्थित सभी को क्रिसमस की शुभकामनाएँ दीं तथा कहा कि क्रिसमस प्रेम, शांति, भाईचारे और मानवता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि प्रभु ईसा मसीह का संपूर्ण जीवन आपसी प्रेम, क्षमा और सेवा की भावना को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। क्रिसमस का पर्व यह संदेश देता है कि सच्ची खुशी दूसरों की सेवा और उनके प्रति करुणा में निहित है।
राज्यपाल ने कहा कि संत जेवियर्स कॉलेज, राँची न केवल झारखंड, बल्कि आसपास के राज्यों के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि यह संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन, नैतिक मूल्यों तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय से निकले विद्यार्थियों ने शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान, साहित्य, खेल एवं सामाजिक सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है।
राज्यपाल संतोष गंगवार ने महाविद्यालय की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संस्थान की प्रतिष्ठा को बढ़ाने में यहाँ के समर्पित शिक्षाविदों का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा है। डी. ब्रावर तथा प्रो. ए. के. सिन्हा जैसे शिक्षाविद अपनी सादगी और विद्यार्थियों के प्रति आत्मीयता के लिए आज भी स्मरण किए जाते हैं। उन्होंने फादर कामिल बुल्के द्वारा रचित हिंदी–अंग्रेजी शब्दकोश को हिंदी भाषा की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि दूसरे देश के होते हुए भी हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रति उनका समर्पण प्रेरणास्पद है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शिक्षा को भारतीय मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे युवा वर्ग न केवल दक्ष, बल्कि संवेदनशील नागरिक के रूप में विकसित हो सके। राज्यपाल ने यह भी कहा कि संत जेवियर्स कॉलेज, राँची आसपास के ग्रामों को गोद लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्रों में बेहतर कार्य करे, जिससे यह संस्थान अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बन सके।
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एयर नाऊ स्पेशल

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न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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