रांची: झारखंड में लंबित छात्रवृत्ति भुगतान और अनिवार्य परमानेंट एजुकेशन नंबर (P.E.N.) को रद्द करने की मांग को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने शुक्रवार (5 दिसंबर)को विधानसभा मार्च निकला। पुलिस प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद छात्र बैरिकेड तोड़कर विधानसभा तक पहुंचने में सफल रहे
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छात्रवृत्ति हमारा अधिकार, एहसान नहीं: छात्र
यह आंदोलन सिर्फ़ रांची तक सीमित नहीं रहा. हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, गुमला, लोहरदगा और साहिबगंज जैसे दूर-दराज के जिलों से बड़ी संख्या में छात्र बिरसा चौक पर इकट्ठा हुए। छात्रों ने जोर-शोर से नारे लगाए: “छात्रवृत्ति हमारा अधिकार, न कि एहसान”।
छात्रों ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कई महीनों से छात्रवृत्ति का भुगतान लंबित है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो गया है, लेकिन सरकार इस मामले को नजरअंदाज कर रही है। इसके अलावा, P.E.N. को बिना किसी उचित आधार के अनिवार्य करने से छात्रों में भारी आक्रोश है। छात्रों ने सरकार पर बार-बार आश्वासन देने के बावजूद कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।
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पुलिस-छात्रों में ज़बरदस्त खींचातानी
बिरसा चौक से शुरू हुए मार्च को रोकने के लिए पुलिस पहले से ही सजग थी। पुलिस ने छात्रों को नियंत्रित करने की पुरजोर कोशिश की। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच ज़बरदस्त खींचातानी हुई। पुलिस ने कुछ छात्रों को वैन में बिठाकर हिरासत में लेने का भी प्रयास किया, लेकिन छात्रों के विरोध के आगे उन्हें पीछे हटना पड़ा।
छात्रों ने पुलिस की कार्रवाई को “शांतिपूर्ण मार्च को रोकने का प्रयास” बताते हुए विरोध और तेज़ कर दिया। छात्र बैरिकेड्स को पार करते हुए अपनी मांगों को लेकर सीधे विधानसभा की ओर बढ़ते रहे। पुलिस प्रशासन की तैनाती छात्रों की संख्या और आक्रोश के आगे नाकाफ़ी साबित हुई।
AISA ने सौंपा मांग-पत्र, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
छात्रों के विधानसभा पहुंचने के बाद, प्रशासन की ओर से एक वरिष्ठ अधिकारी को उनकी बात सुनने के लिए भेजा गया। AISA के प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारी को एक विस्तारपूर्वक लिखित मांग-पत्र सौंपा, जिसमें दो मुख्य मांगें शामिल थीं:
– सभी लंबित छात्रवृत्तियों का तत्काल भुगतान किया जाए।
-P.E.N. प्रणाली को तुरंत वापस लिया जाए।
अधिकारी ने छात्रों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को संबंधित विभाग तक पहुंचाया जाएगा और गंभीरता से विचार किया जाएगा। हालांकि, AISA नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो जनवरी में राज्यभर में बड़े पैमाने पर और उग्र संघर्ष किया जाएगा।


