बिहार : बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज अपने अंतिम चरण में पहुंच गया। पांच दिवसीय इस सत्र के आखिरी दिन सदन में व्यय-विवरणी पर चर्चा होनी है। सत्र की शुरुआत से लेकर अब तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, नए चेहरों की एंट्री और अनुपूरक बजट पर बहस ने माहौल को गर्म बनाए रखा।
शीतकालीन सत्र में सरकार की ओर से दूसरा अनुपूरक बजट सदन में पेश किया गया, जिस पर चर्चा के बाद उसे मंजूरी मिल गई। विभिन्न विभागों के लिए अतिरिक्त राशि आवंटन और योजनाओं पर खर्च को लेकर सरकार ने अपना पक्ष रखा, वहीं विपक्ष ने कई मुद्दों पर सवाल खड़े किए। इस सत्र की एक खास बात यह रही कि नए विधायकों ने शपथ ली और सदन में अपनी औपचारिक शुरुआत की। इसी दौरान प्रेम कुमार को विधानसभा अध्यक्ष चुना गया, जबकि नरेंद्र नारायण यादव उपाध्यक्ष बने। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्वाचन के दौरान सदन में राजनीतिक समीकरण और दलों की रणनीति साफ दिखाई दी।
सत्र के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री और विपक्ष के प्रमुख चेहरे तेजस्वी यादव की लगातार गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। सत्ता पक्ष के नेताओं ने उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठाए और इसे जनता के मुद्दों से दूरी बताया, जबकि राजद खेमे ने इसे राजनीतिक नजरिये से देखने की बात कही। शीतकालीन सत्र में प्रश्नकाल, शून्यकाल और विशेष बहसों के दौरान शिक्षा, रोजगार, कानून-व्यवस्था, विकास योजनाओं और किसानों से जुड़े मुद्दे उठे। कांग्रेस को बोलने के लिए मिले सीमित समय को लेकर भी विपक्षी खेमे में नाराजगी देखी गई, जिस पर कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताई।
सदन की कार्यवाही के दौरान कई बार माहौल तीखा भी हुआ, तो कई मौकों पर चुटीले तंज और हल्के-फुल्के अंदाज ने तनाव को कम भी किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विपक्षी सदस्यों के बीच बहस के साथ-साथ कुछ हल्के पलों ने भी ध्यान खींचा। कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा का यह शीतकालीन सत्र राजनीतिक हलचल, बजट बहस, नए चेहरों की एंट्री और तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर जारी सियासी बयानबाज़ी के बीच आज समाप्त होने जा रहा है।


