रांची : संयुक्त बिहार के दौरान साल 1984 में हुए चर्चित सिख दंगा में वर्तमान में झारखंड के पीड़ितों व प्रभावितों को मुआवजा दिलाने और दंगा-संबंधित आपराधिक मामलों की मॉनिटरिंग की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने की। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मुआवजा भुगतान और जांच रिपोर्ट तैयार करने के लिए गठित वन मैन कमीशन को उपलब्ध कराई गई सभी सुविधाएँ और संसाधन फिलहाल यथावत जारी रहें।
कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए कमीशन को जो भी प्रशासनिक या तकनीकी सहायता दी गई है, उसमें किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जानी चाहिए। इस दौरान अदालत ने राज्य सरकार से यह भी पूछा कि अब तक पीड़ितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया किस चरण में है और दंगा-संबंधित आपराधिक मामलों की जांच की प्रगति कितनी हुई है। राज्य सरकार को दोनों विषयों पर विस्तृत प्रगति रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
Also Read : झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का संबोधन
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि न्याय की प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवेदनशीलता आवश्यक है। अदालत ने कहा कि 1984 के पीड़ितों को न्याय दिलाना केवल एक सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की नैतिक जिम्मेदारी भी है। जब हर पीड़ित को न्याय मिले, तभी कहा जा सकता है कि एक देश सबसे बढ़िया है। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने सुनवाई स्थगित करते हुए अगली तारीख अगले साल 2026 के मार्च महीने में निर्धारित की है.


