देश : कफ सिरप मामला अभी तक खत्म नहीं हुआ है। एक के बाद एक सनसनी खुलासे हो रहे है। कही कफ सिरप की तस्करी हो रही है। तो कही कफ सिरप का व्यापार रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। ऐसे में एक और खुलासे ने सबको चौंका दिया है। दरअसल हाल ही में मध्यप्रदेश में कप सिरप से बच्चों के मौत का मामला सामने आया था. जिसके बाद योगी सरकार पूर्ण कार्रवाई में है. आपको बता दें, कोडीन फॉस्फेट युक्त कप सिरप का बनारस और बांग्लादेश कनेक्शन भी अब सामने आया है. इसमें बनारस के 26 से ज्यादा थोक व्यापारी शामिल है. जिसमें रांची के मेसर्स शेली ट्रेडर्स का नाम सबसे ऊपर है. शैली ट्रेडर्स ने ही यूपी के अलावा बिहार और अन्य राज्यों के 100 से ज्यादा दवा व्यापारियों को 100 करोड़ का फेंसिडिल कफ सिरप की सप्लाई की है. और ये जानकार हैरानी होगी की अकेले बनारस में 26 कारोबारियों को 50 करोड़ की सिरप बेची गई थी.
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10 फर्मों का निरीक्षण और सत्यापन
बता दें, 13 व 14 नवंबर को शैली ट्रेडर्स से कोडिनयुक्त कफ सीरप खरीदने वाली 10 फर्मों के निरीक्षण एवं सत्यापन किए गए, जिसमें शैली ट्रेडर्स के अलावा मेसर्स डीएसए फार्मा, महाकाल मेडिकल स्टोर, निशांत फार्मा, वीपीएम मेडिकल एजेंसी एवं बालाजी मेडिकल बंद मिले थे। हालांकि सूत्र बताते है कि इन सिरप की सप्लाई और बिक्री सिर्फ और सिर्फ कागजों पर हुई है. इसका असली कनेक्शन बांग्लादेश से जुड़ा हुआ है. नशे के लिए इन कफ सिरप की सप्लाई बांग्लादेश में की जाती थी क्योंकि वहां इसके अच्छे खासे पैसे मिल जाते थे. बताया जा रहा है वहां नशे के लिए लोग इसे 10 गुना ज्यादा कीमतों पर खरीदते हैं. इस पैसे का एक हिस्सा उन कारोबारियों को भी मिलता था जिनके नाम से बनारस में दवाइयों की मोल-भाव की जा रही थी.

26 व्यापारियों के खिलाफ मामला दर्ज
इस मामले में जैसे ही तथ्य सामने आए रांची के ड्रग इंस्पेक्टर जुनाब अली ने शैली ट्रेडर्स के भोला प्रसाद, शुभम जायसवल सहित 26 अन्य लोगों के खिलाफ कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराया है. इसके साथ ही इस मामले से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी पुलिस को दिए गए हैं. रांची के शैली ट्रेडर्स ने साल 2023-2025 तक ऐबट हेल्थ केयर के 89 लाख कप सिरप 100 करोड़ में खरीदें थे. इनमें से 50 करोड़ के कफ सिरप की बिक्री वाराणसी के 28 होलसेल दुकानों पर हुई थी. खाद्य सुरक्षा औऱ औषधि प्रशासन विभाग(Food Safety and Drug Administration Department) के आयुक्त ने जब इसकी जांच शुरू की तो पता चला कि जिन फर्मों को वाराणसी में यह कफ सिरप बेची गई थी. वहां उनके पास इसके बिक्री से जुड़ा कोई रिकॉर्ड नहीं है. जांच के दौरान कई दुकानें बंद भी मिली. जानकारी ये भी सामने आई कि कुछ फर्म जिन्हें सिरप बेचा गया था वो अब बंद हो चुके हैं. जबकि नियम ये है कि इन दवाइयों के बिक्री का पूरा रिकॉर्ड दवा विक्रेताओं को रखना पड़ता है.वाराणसी पुलिस इस मामले में FIR के बाद आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है. माना जा रहा है जल्द इस मामले में गिरफ्तारियां भी हो सकती है. फिलहाल पुलिस के निशाने पर इसका मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल है.
क्या है मामला
ये मामला हाल ही में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कुछ बच्चों की कथित तौर पर कफ सिरप पीने से मौत हो गई थी, जिससे राज्य में मरने वालों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि बच्चों की मौत किडनी फेल होने से हुई थी, और नमूने जांच के लिए भेजे गए थे । कुछ मामलों में आयुर्वेदिक कफ सिरप को भी कारण बताया गया है। इन मौतों के बाद, राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई की थी और डॉक्टर और निर्माता कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।


