रांची: 6 सितंबर को झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के आकस्मिक निधन हो जाने के बाद अब झारखंड में गिरिडीह विधानसभा सीट पर उपचुनाव संभावित है. 6 महीने के अंदर उपचुनाव होने की बाध्यता के चलते इस उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सुगबुगाहट होने लगी है.
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बताया जा रहा है कि इस संबंध में झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की ओर से केंद्रीय चुनाव आयोग को औपचारिक रूप से जानकारी उपलब्ध करा दी गई है. 6 महीने की अवधि हालांकि अगले साल मार्च के शुरू में पूरी होगी लेकिन चर्चा यह है कि क्या इस उपचुनाव में जाने से पहले जेएमएम व इसके मुखिया सीएम हेमंत सोरेन वहीं दांव आजमाएंगे, जो उन्होंने पहले मधुपुर और फिर बाद में डुमरी उपचुनाव के लिए आजमाया था.
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परिवार से उम्मीदवार उतारने की चर्चा
दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार ने साल 2019 और 2024 में गिरिडीह विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी. 2024 में उन्हें मंत्री पद भी मिला था. उनके निधन के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि JMM उनके परिवार से किसी सदस्य को उम्मीदवार बना सकती है. खासकर उनकी पत्नी श्वेता शर्मा का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पिछले फैसलों को देखते हुए यह संभावना मजबूत मानी जा रही है. जैसे मधुपुर में हाजी हुसैन अंसारी और डुमरी में जगन्नाथ महतो के निधन के बाद उनके परिवार से ही प्रत्याशी उतारे गए थे.
बीजेपी और अन्य दलों की रणनीति
गिरिडीह उपचुनाव में JMM के साथ-साथ बीजेपी और अन्य दलों की रणनीति पर भी सबकी नजरें हैं. 2024 के चुनाव में सुदिव्य सोनू ने बीजेपी उम्मीदवार निर्भय कुमार शाहाबादी को हराया था. ऐसे में उपचुनाव केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के लिए संगठन और जनाधार परखने का बड़ा मौका है. JMM के लिए सकारात्मक पक्ष यह है कि सोनू संगठन में सक्रिय थे और मुख्यमंत्री व उनकी पत्नी कल्पना सोरेन के करीबी थे. उनके असमय निधन से जनता की सहानुभूति उनकी पत्नी श्वेता शर्मा के साथ जा सकती है.
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर भी नजर
गिरिडीह जिले में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण भी चल रहा है. जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि अंतिम प्रकाशन की तारीख 19 अक्टूबर 2026 तय की गई है. दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि 30 सितंबर तक बढ़ाई गई है. इसका असर उपचुनाव की तैयारियों पर भी पड़ेगा.
वोटरों को इंतजार दलों के फैसले का
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि JMM, बीजेपी और अन्य दल किस चेहरे को मैदान में उतारते हैं. उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद चुनावी तस्वीर साफ होगी. इसके बाद चुनाव आयोग नामांकन, मतदान और मतगणना की तारीखें घोषित करेगा. यह उपचुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि यह सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद खाली हुई सीट पर हो रहा है. आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की गतिविधियां और तेज होंगी और जनता की नजरें अब चुनावी घोषणा और प्रत्याशियों के नाम पर टिकी हैं.


