न्यूज डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई अहम शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। रविवार को यह बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका फिर से गहरा गई है। हालांकि फिलहाल दोनों देशों के बीच तुरंत किसी नए हमले की खबर नहीं है, लेकिन हालात नाजुक बने हुए हैं। इस बीच बातचीत के टूटते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका ‘ईरान का जो थोड़ा बहुत बचा है, उसे भी खत्म कर देगा’।
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संयम बरतने की सलाह
वार्ता के टूटने के बाद दुनिया भर के नेताओं ने अमेरिका और ईरान से अपील की है कि वे मौजूदा अस्थायी युद्धविराम का पालन करें और कूटनीतिक रास्ता अपनाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देश बातचीत का रास्ता छोड़ते हैं, तो इससे पूरे पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ सकते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों पक्षों पर शांति बनाए रखने का दबाव बना रहा है।
अमेरिका ने दिया ‘अंतिम प्रस्ताव’
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस वार्ता में शामिल थे और बातचीत खत्म होने के बाद पाकिस्तान से लौट गए। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के सामने अपना ‘अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव’ रखा था। वेंस के मुताबिक, अमेरिका चाहता था कि बातचीत के जरिए समाधान निकले, लेकिन फिलहाल यह प्रयास सफल नहीं हो सका।
रूसी राजनयिक ने अमेरिका से ये कहा
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए में रूस के प्रतिनिधि ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से सवाल किया है. आईएईए में रूस के प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने ईरान के साथ समझौता न होने के बारे में जेडी वेंस की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा, “क्या उपराष्ट्रपति को वास्तव में उम्मीद थी कि इतने जटिल और बहुआयामी मुद्दे पर कुछ ही घंटों में समझौता हो जाएगा?”
एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि समझौता तभी संभव है जब एक पक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हो (जो इस मामले में नहीं है). उल्यानोव ने आगे कहा, “अगर अमेरिकी पक्ष समझौता चाहता है, तो उसे विशेषज्ञ स्तर पर कई दौर की बातचीत के लिए तैयार रहना होगा. कूटनीति में यह एक बुनियादी प्रक्रिया है.”

