न्यूज डेस्क : भारत ने चीन की ओर से उन जगहों का नया नाम देने पर कड़ी आपत्ति जताई है जो भारत का हिस्सा हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस मुद्दे पर भारत का बयान साझा किया है. इस संबंध में मीडिया के सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत, चीन की ओर से उन जगहों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को पूरी तरह से ख़ारिज करता है, जो भारतीय क्षेत्र का हिस्सा हैं.”
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विदेश मंत्रालय ने कहा, “झूठे दावे करने और मनगढ़ंत बातों वाले चीन के ऐसे प्रयास इस अटल सच्चाई को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश समेत ये जगहें और क्षेत्र हमेशा से भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं और हमेशा रहेंगे. चीन की ओर से की गई ये हरकतें, भारत-चीन के आपसी संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के लिए चल रहे प्रयासों को कमज़ोर करने वाली हैं. चीन को ऐसी हरकतों से बचना चाहिए, जो संबंधों को बिगाड़ती हैं और आपसी समझ को बेहतर बनाने के प्रयासों को नुक़सान पहुँचाती हैं.”
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ चीन ने अपने शिनजियांग प्रांत में, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के पास एक नया ज़िला बनाया है. सेनलिंग नाम का यह ज़िला, काराकोरम पर्वतमाला के पास स्थित है, जो इसके रणनीतिक महत्व को दर्शाता है.
पीटीआई का कहना है, “पिछले साल भारत ने हीन और हेकांग ज़िलों के निर्माण को लेकर चीन के सामने विरोध दर्ज कराया था. भारत ने कहा था कि इन ज़िलों का कुछ इलाक़ा उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अधिकार क्षेत्र में आता है. हीन ज़िले में विवादित अक्साई चिन पठार का एक बड़ा हिस्सा शामिल है. यह लद्दाख का वह हिस्सा है जिस पर चीन ने 1962 के युद्ध में कब्ज़ा कर लिया था, और तब से यह भारत-चीन सीमा विवाद का एक मुख्य मुद्दा बना हुआ है.”


