Tuesday, July 21, 2026

पारंपरिक सुरक्षा प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं, अब साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक विज्ञान, अपराध मनोविज्ञान और खुफिया विश्लेषण भी जरूरी : राज्यपाल

रांची : मोरहाबादी में शुक्रवार को झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यपाल-सह-झारखंड विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को संबोधित किया। राज्यपाल ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं होता, बल्कि यह उस संस्थान की विचारधारा, मेहनत और समाज के विश्वास का प्रतीक है, झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय आज अपने इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय लिख रहा है।

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उन्होंने बताया कि इस विश्वविद्यालय की आधारशिला देश के पूर्व रक्षा मंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर द्वारा रखी गई थी, जिनकी सादगी और कर्मशीलता आज भी प्रेरणा का स्रोत है। इस संस्थान की स्थापना का उद्देश्य केवल सामान्य शिक्षा नहीं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, सुरक्षा-चेतना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रशासनिक दक्षता विकसित करना है। झारखंड के युवाओं में सेना और पुलिस सेवाओं के प्रति विशेष उत्साह देखा जाता है, परंतु उचित मार्गदर्शन और आधुनिक प्रशिक्षण की कमी के कारण कई युवा पीछे रह जाते हैं। ऐसे में यह विश्वविद्यालय बेहद महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में पारंपरिक सुरक्षा प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है। युवाओं को साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक विज्ञान, अपराध मनोविज्ञान, खुफिया विश्लेषण, पुलिस प्रबंधन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में दक्षता हासिल करनी होगी। राज्यपाल ने कहा कि झारखंड की पहचान जामताड़ा के साइबर अपराध के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा शिक्षा के केंद्र के रूप में होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि इस विश्वविद्यालय के छात्र राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने में अहम भूमिका निभाएँगे।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी उपाधि केवल डिग्री नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य का एहसास कराती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ की सराहना करते हुए कहा कि यह नीति उच्च शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और भविष्य उन्मुख बना रही है। विश्वविद्यालय का कार्य केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं, बल्कि नवाचार, अनुसंधान और समाधान आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना भी है। उन्हें विश्वास है कि आने वाले वर्षों में झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय डिजिटल सुरक्षा, साइबर फॉरेंसिक, आंतरिक सुरक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्र में देश का अग्रणी संस्थान बनेगा।

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अंत में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे जहाँ भी जाएँ, अपने ज्ञान और संस्कारों से झारखंड और देश का गौरव बढ़ाएँ। उन्होंने सभी स्नातक विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं और कहा कि इनकी सफलता समाज के लिए प्रेरणा बनेगी।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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