देश: देश की पहली महिला प्रधानमंत्री और आयरन लेडी के नाम से मसहूर इंदिरा गांधी का आज ही के दिन यानी 31 अक्तूबर 1984 की सुबह उनके अंगरक्षकों ने ही गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। आज उनकी 41वीं पुण्यतिथि हैं। इस मौके पर कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने दिल्ली स्थित शक्ति स्थल पर जाकर उन्हें श्रध्दांजली अर्पित की। उनके हत्या से देश में तो बवाल सा मच गया था। सिख दंगे के चलते पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में डर का माहौल पैदा हो गया था। इंदिरा गांधी ने देश के लिए कई ऐसे दमदार फैसले लिए जिसने भारत को पूरी दूनिया में पहचान दिलाई। ऐसा माना जाता है कि इंदिरा गांधी को अपनी हत्या का आभास हो गया था। 1971 में उन्होंने पाकिस्तान को हराकर बांग्लादेश का निर्माण, बैंकों का राष्ट्रीयकरण, परमाणु परीक्षण और हरित क्रांति को बढ़ावा देना उनका प्रमुख योगदान था। उन्होंने अपनी हत्या से ठीक एक दिन पहले भुवनेश्वर में जो भाषण दिया था उसके बोल इस बात का संकेत देते हैं कि उन्हें इस बात का आभास था कि उनपर हमला हो सकता है, उनकी हत्या हो सकती है।
कहां दिया था आखिरी भाषण
इंदिरा गांधी ने अपना आखिरी भाषण 30 अक्तूबर 1984 को भुवनेश्वर में दिया था। इस भाषण में उन्होंने जो बातें कहीं उससे ऐसा लगता है जैसे कि उनके साथ कुछ अनहोनी घटने वाली थी। इंदिरा ने कहा था मैं आज यहां हूं, हो सकता है कि कल मैं यहां न हूं। उन्होंने आगे अपने भाषण में कहा कि अगर मैं जीवित नहीं रही तो मेरे खून का एक-एक कतरा भारत को मजबूत करेगा। दरअसल, 30 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी ने बिल्कुल लीक से हटकर अपना भाषण दिया। इंदिरा का भाषण उनके सूचना सलाहकार एचवाई शारदा ने लिखा था लेकिन इंदिरा ने उससे हटकर कुछ अलग ही भाषण दिया। इंदिरा एचवाई शारदा का लिखा भाषण छोड़कर खुद से ही बोलने लगीं।
इंदिरा ने कही थी ये बात
इंदिरा गांधी ने अपने भाषण में कहा- ‘मैं आज यहां हूं। कल शायद यहां न रहूं। मुझे चिंता नहीं मैं रहूं या न रहूं। मेरा लंबा जीवन रहा है और मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने अपना पूरा जीवन अपने लोगों की सेवा में बिताया है। मैं अपनी आखिरी सांस तक ऐसा करती रहूंगी और जब मैं मरूंगी तो मेरे ख़ून का एक-एक क़तरा भारत को मजबूत करने में लगेगा। इंदिरा गांधी की इन बातों को सुनकर कांग्रेस के सभी नेता हैरान रह गए। उन्हें ये समझ नहीं आ रहा था कि आखिर इंदिरा गांधी ने अपनी भाषण में ऐसी बातें क्यों कही। कहा जाता है कि भुवनेश्वर से वापस लौटने के बाद इंदिरा गांधी को रात में ठीक से नींद नहीं आई। इसका जिक्र कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी अपनी किताब में किया है। उन्होंने लिखा कि 30 अक्टूबर1984 की रात को जब वे अपने दमे की दवा लेने के लिए उठीं तो इंदिरा गांधी उस वक्त भी जाग रही थीं। इंदिरा ने उनसे कहा कि अगर रात में कोई प्रॉब्लम हो तो उन्हें आवाज दे देना।
कैसे हुई हत्या?
अगले दिन 31 अक्टूबर को वह सुबह करीब 9 बजे इंदिरा गांधी को विदेश से आए डेलिगेशन से मिलना था। वे डॉक्यूमेंट्री के लिए इंदिरा गांधी का इंटरव्यू लेना चाहते थे। इंदिरा गांधी अपने आवास से बाहर निकलीं और कुछ दूर चलने पर इंदिरा वहां पहुंची जहां से एक सफदरजंग रोड और एक अकबर रोड एक गेट के जरिए जुड़ते हैं। गेट के पास सब इंस्पेक्टर बेअंत सिंह और कॉंस्टेबल सतवंत सिंह ड्यूटी पर तैनात थे।
पहले नमस्ते किया, फिर ताबड़तोड़ फायरिंग
दोनों ने हाथ जोड़कर इंदिरा गांधी को नमस्ते किया। इंदिरा गांधी ने भी दोनों का अभिवादन स्वीकार किया। इस बीच बेअंत सिंह हरकत में आया और उसने अपनी सरकारी रिवॉल्वर निकाल कर इंदिरा गांधी पर फायरिंग शुरू कर दी। गोली लगते ही इंदिरा जमीन पर गिर पड़ीं। इसके बाद सतवंत सिंह अपनी स्टेनगन से इंदिरा गांधी पर फायरिंग करने लगा। उसने अपनी पूरी स्टेनगन खाली कर दी। इंदिरा गांधी का पूरा शरीर गोलियों से छलनी हो चुका था। उन्हें तुरंत दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इंदिरा गांधी के 10 कड़े फैसले जिन्हेंने उन्हें आयरन लेडी बना दिया–
1967 में उन्होंने चीन को धूल चटाई थी, दरअसल इंदिरा गांधी भूटान को सपेर्ट करने की वजह से चीन के निशाने पर आ गईं थी। चीन इसका बदला लेने के लिए घुसपैठ की कोशिश में लग गया। उस वक्त इंदिरा गांधी ने ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके खुले तौर पर साफ कर दिया कि भारत भूटान की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहेगा।
1971 में पाकिस्तान को हराकर बांग्लादेश बनाया
1969 में इंदिरा गांधी ने 14 बैंकों का राष्ट्रयकरण कराया
अमेरिका के साथ खाद्यान्न समझौता
परमाणु परीक्षण को लेकर काफी प्रयास किए
आपरेशन ब्लू स्टार चलाया था
हरित क्रांति को बढ़ावा दिया
राज्यों के राजाओं की प्रिवी पर्स समाप्ति 1971
गरीबी हटाओ अभियान
इंदिरा गांधी ने 10 सूत्रीय कार्यक्रम चलाया था – इंदिरा गांधी ने 1967 में 10 सूत्रीय कार्यक्रम चलाया था। यह कांग्रेस कार्य समिति द्वारा अपनाया गया एक सामाजिक और आर्थिक सुधार कार्यक्रम था, जिसमें भूमि सुधार, बैंकों का राष्ट्रकरण, और शहरी संपत्ति की सीमा जैसे उपाय शामिल थे।


