Saturday, June 13, 2026

TMC की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी से दिया इस्तीफा, असम के सीएम से की मुलाकात

न्यूज डेस्क: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने संसदीय पद के साथ-साथ संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने केवल राज्यसभा की सदस्यता ही नहीं छोड़ी, बल्कि असम में तृणमूल कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष समेत संगठन के सभी पदों से भी इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने बुधवार को राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

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2021 में हुई थी टीएमसी में शामिल

53 वर्षीय सुष्मिता देव ने वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। उस समय उन्होंने नई राजनीतिक यात्रा शुरू करने और जनता की सेवा को प्राथमिकता देने की बात कही थी। टीएमसी में शामिल होने के बाद उन्हें पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी थीं। सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों का दावा है कि वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो सकती हैं। इन अटकलों को उस समय और बल मिला जब इस्तीफा देने के बाद उनकी मुलाकात असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से हुई।

राजनीतिक परिवार से आता है सुष्मिता

सुष्मिता देव असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष मोहन देव की बेटी हैं। वह कांग्रेस की महिला इकाई ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। इसके अलावा वह असम के सिलचर लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी रह चुकी हैं, जिसे उनके परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता है।

इससे पहले इसी सप्ताह राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने भी टीएमसी से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उन्होंने अपने बयान में पार्टी और पश्चिम बंगाल सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए थे। लगातार दो राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे को पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

पार्टी के भीतर बढ़ रही चुनौतियां

हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। पार्टी के अंदर नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर मतभेद की चर्चाएं भी राजनीतिक हलकों में बनी हुई हैं। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं का इस्तीफा पार्टी नेतृत्व के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकता है। विपक्षी दलों ने इन इस्तीफों को टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत बताया है। वहीं पार्टी की ओर से अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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