Wednesday, June 3, 2026

टीएमसी ने दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से किया निष्कासित, ये है पूरा मामला

कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया है. ऋतब्रत बनर्जी उलुबेरिया पूर्व से और संदीपान साहा एंटाली से विधायक हैं. हालांकि पार्टी की ओर से निष्कासन के पीछे आधिकारिक कारणों का विस्तृत विवरण अभी सामने नहीं आया है. टीएमसी के इस फैसले को राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है.

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संदीपन साहा की प्रतिक्रिया

बताया जा रहा है कि संदीपन साहा उन साठ विधायकों में शामिल हैं जो ममता बनर्जी के कालीघाट आवास पर होने वाली बैठक में नहीं पहुंचे थे और बैठक को रद्द कर दिया गया था. इस कार्रवाई के बाद संदीपन साहा ने पार्टी के अंदर हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि जिन लोगों की बैठक में मौजूदगी नहीं थी, उनके हस्ताक्षर प्रस्ताव में शामिल किए गए. उनके अनुसार, यह एक बड़ी गलती है और इस मामले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.

हस्ताक्षर जालसाजी मामले की CID जांच

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद हुई है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि विधानसभा में कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की सीआईडी जांच इन्हीं दोनों टीएमसी विधायकों की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को दी गई औपचारिक शिकायत के आधार पर शुरू की गई थी.

बैठक में नहीं पहुंचे 60 विधायक

बता दें कि पिछले दिनों ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास पर सभी विधायकों की बैठक बुलाई थी, जिसमें ज्यादातर विधायक शामिल नहीं हुए. बताया जा रहा है कि करीब 60 विधायक इस मीटिंग में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद बैठक को कैंसिल करना पड़ा. उधर TMC प्रवक्ता कुणाल घोष का दावा है कि ज्यादातर विधायकों ने फोन कर बता दिया था की मीटिंग में शामिल नहीं हो पाएंगे क्योंकि वो अपने इलाकों में हिंसा के विरोध में लड़ाई लड़ रहे हैं.

लेकिन इस मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब TMC विधायक संदीपन साहा ने ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल न होने की वजह सार्वजनिक रूप से बताई. संदीपन साहा उन करीब 60 विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने मुख्यमंत्री के आवास पर आयोजित पूर्व निर्धारित बैठक में हिस्सा नहीं लिया था.

संदीपन साहा ने मीडिया में कहा

मीडिया से बातचीत के दौरान साहा ने कहा कि विधानसभा में पार्टी नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) की नियुक्ति को लेकर पहले ही एक बैठक आयोजित की जा चुकी थी. उस बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित किया गया था. उनके अनुसार, बाद में यह मामला इसलिए जांच के दायरे में आया क्योंकि प्रस्ताव को विधानसभा में भेजने से पहले जरूरी प्रोसेस फॉलो नहीं की गई थी.

संदीपन साहा ने कहा कि जब एक बार इस विषय पर बैठक हो चुकी थी और प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया था, तब दोबारा बैठक बुलाने की जरूरत को लेकर उनके मन में सवाल थे. उन्होंने पूछा कि क्या नई बैठक बुलाने से पहले सभी प्रक्रियाओं और नियमों की समीक्षा की गई थी या नहीं.

टीएमसी विधायक ने कहा, “इस मुद्दे पर पहले ही बैठक हो चुकी थी. उस बैठक में तय किया गया था कि पार्टी नेता, उपनेता और चीफ व्हिप कौन होंगे. लेकिन बाद में यह सामने आया कि प्रस्ताव को विधानसभा में जमा करने की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार नहीं अपनाई गई थी. इसके बाद मामले की जांच हुई. अब फिर से बैठक बुलाई गई. ऐसे में मेरे मन में सवाल था कि क्या इस बार सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा कर ली गई है.”

उन्होंने आगे कहा कि इन्हीं कारणों से उन्हें लगा कि बैठक में शामिल होने का कोई विशेष औचित्य नहीं है. इसलिए उन्होंने उसमें हिस्सा नहीं लिया. संदीपन साहा के बयान को टीएमसी के भीतर से सामने आई एक बड़ी असहमति के रूप में देखा जा रहा है. आमतौर पर पार्टी के विधायक सार्वजनिक मंचों पर संगठनात्मक निर्णयों या नेतृत्व की प्रक्रिया पर सवाल उठाने से बचते रहे हैं. ऐसे में साहा की टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है.

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