Friday, June 19, 2026

दुबई से मिला टारगेट, हमला कर डिलीट कर दी चैट! मिटे संदेशों में छिपे हैं RSS दफ़्तर पर हमले के बड़े राज

रांची : निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यालय पर पेट्रोल बम हमले की जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां हर डिजिटल सुराग बड़े खुलासे की ओर इशारा कर रहा है। जांच में सामने आया है कि हमले के बाद आरोपियों ने दुबई में बैठे अपने कथित आकाओं के साथ हुई व्हाट्सएप चैट को डिलीट कर दिया था। अब जांच एजेंसियां उन संदेशों, ऑडियो और वीडियो फाइलों को दोबारा हासिल करने में जुटी हैं।

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हमले की साजिश विदेश में तैयार

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों सैफ अंसारी, अमन अंसारी और सायम सुजान से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि हमले की साजिश विदेश में तैयार की गई थी और उसे अंजाम देने के लिए स्थानीय मॉड्यूल का इस्तेमाल किया गया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि सैफ पहले अबूधाबी शाहजहां और बाद में दुबई गया था। वहीं उसकी मुलाकात राणा हुसैन उर्फ राणा जी और पाकिस्तान से जुड़े बताए जा रहे शाहबाज आलम उर्फ भट्टी से हुई थी।

हमले की सीधी जानकारी नहीं

बताया जा रहा है कि सैफ को हमले के लक्ष्य की सीधी जानकारी नहीं दी गई थी। उसे एक वीडियो लिंक भेजा गया, जिसमें दिखाए गए स्थान की पहचान कर वहां हमला करने को कहा गया। भारत लौटने के बाद सैफ और अमन लगातार राणा और भट्टी के संपर्क में थे। जांच एजेंसियों को पता चला है कि दोनों पक्षों के बीच व्हाट्सएप के माध्यम से बातचीत हुई थी। हालांकि वारदात के बाद चैट हिस्ट्री को डिलीट कर दिया गया। अब पुलिस उन संदेशों को रिस्टोर करने का प्रयास कर रही हैं।

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जांच में दिलचस्प पैटर्न का खुलासा

सूत्र बताते हैं कि शुरुआती जांच में एक दिलचस्प पैटर्न सामने आया है। कथित तौर पर राणा और भट्टी की ओर से सीधे संदेश बहुत कम आते थे। जब अमन और सैफ पूछते थे कि “क्या बॉस नाराज हैं?”, तब जवाब मिलता था कि “नहीं, टारगेट पूरा करो।” जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि इन संदेशों के पीछे आखिर किस तरह का नेटवर्क काम कर रहा था और हमले का वास्तविक उद्देश्य क्या था।

कई और चौंकाने वाले खुलासे

यदि डिलीट किए गए व्हाट्सएप संदेश, ऑडियो क्लिप और वीडियो फाइलें सफलतापूर्वक रिकवर हो जाती हैं तो इस पूरे मामले में कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। इससे न केवल कथित विदेशी संपर्कों की भूमिका स्पष्ट होगी, इस बीच रांची पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, पूरे मामले को अब आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) को सौंपने की तैयारी है। एटीएस के हाथ में जांच आने के बाद विदेशी संपर्कों, डिजिटल साक्ष्यों और संभावित नेटवर्क की और गहन पड़ताल की जाएगी। डिलीट किए गए व्हाट्सएप संदेशों पर है, जिनमें इस पूरे रहस्य की सबसे अहम कड़ी छिपी हो सकती है।

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