Wednesday, July 22, 2026

फैसलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- फैसला सुरक्षित रखने वाले मामले में तीन महीने में हाई कोर्ट सुनाएं फैसला

नई दिल्ली: अदालती फैसलों में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने देश के सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया है कि आदेश सुरक्षित रखने के बाद अधिकतम तीन महीने के भीतर फैसला सुनाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्याय में देरी से वादियों को अपूरणीय क्षति होती है और इससे न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी प्रभावित होता है।

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व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने विशेष रूप से व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में तेजी लाने पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि जमानत याचिकाओं पर आदेश उसी दिन सुनाया जाना चाहिए। अगर किसी कारणवश आदेश सुरक्षित रखा जाता है, तो उसे अगले दिन सुनाकर तुरंत अपलोड किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा कि जमानत या सजा निलंबन से संबंधित आदेश जारी होते ही जेल प्रशासन को तत्काल सूचना दी जानी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि विचाराधीन कैदी या दोषी को उसी दिन, या अधिकतम अगले दिन तक रिहा कर दिया जाना चाहिए, ताकि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो।

न्याय में देरी को बताया गंभीर समस्या

पीठ ने कहा कि लंबे समय तक फैसले लंबित रहने से संबंधित पक्षों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अदालत ने माना कि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न्याय के मूल उद्देश्य को प्रभावित करती है। इसलिए अदालतों को समयबद्ध तरीके से फैसले सुनाने की दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों को न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और आम लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा।

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