Saturday, September 26, 2026

एसिड अटैक मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से विस्तृत रिपोर्ट तलब

दिल्ली: देश में बढ़ते एसिड अटैक के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एसिड अटैक से जुड़े मामलों की साल-दर-साल विस्तृत जानकारी देने को कहा है। कोर्ट का उद्देश्य यह जानना है कि इन जघन्य अपराधों में जांच, ट्रायल और अपील की प्रक्रिया किस स्तर पर पहुंची है और न्याय मिलने में कहां देरी हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश एसिड अटैक की साल-दर-साल घटनाओं का पूरा ब्योरा पेश करें। इसमें यह जानकारी शामिल होगी कि हर साल कितनी घटनाएं दर्ज हुईं और उनमें क्या कार्रवाई की गई।

चार्जशीट वाले मामलों की जानकारी

शीर्ष अदालत ने यह भी पूछा है कि एसिड अटैक के कितने मामलों में चार्जशीट दायर की गई है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि पुलिस जांच कितनी प्रभावी है और कितने मामलों में जांच समय पर पूरी हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ट्रायल कोर्ट स्तर पर कितने मामले निपटाए जा चुके हैं और कितने मामले अब भी लंबित हैं। इसकी पूरी जानकारी देने को कहा है। कोर्ट का मानना है कि ट्रायल में देरी पीड़ितों को न्याय से वंचित करती है।

हाईकोर्ट और अपीलीय अदालतों का ब्योरा

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट और अन्य अपीलीय अदालतों में दायर अपीलों की संख्या भी मांगी है। इससे यह स्पष्ट होगा कि निचली अदालतों के फैसलों के खिलाफ कितने मामले ऊपरी अदालतों तक पहुंचे हैं और वहां उनकी स्थिति क्या है। एसिड अटैक एक गंभीर और अमानवीय अपराध है, जो पीड़ित के पूरे जीवन को प्रभावित कर देता है। ऐसे मामलों में त्वरित जांच, तेज सुनवाई और कड़ी सजा बेहद जरूरी मानी जाती है। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम यह सुनिश्चित करने की दिशा में है कि कानून का सही तरीके से पालन हो और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।

राज्यों की जवाबदेही तय करने की कोशिश

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्देश से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जवाबदेही तय होगी। अलग-अलग स्तर पर मामलों की स्थिति सामने आने से यह पता चलेगा कि कहां लापरवाही हो रही है और किस राज्य में सुधार की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर आगे की सुनवाई में तेजी लाने, जांच प्रक्रिया सुधारने और एसिड अटैक पीड़ितों को बेहतर मुआवजा व सहायता देने जैसे मुद्दों पर निर्देश जारी किए जा सकते हैं। एसिड अटैक मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का यह सख्त रुख पीड़ितों के लिए उम्मीद की किरण माना जा रहा है। साल-दर-साल आंकड़ों और अदालती प्रक्रिया की स्थिति सामने आने के बाद यह तय हो सकेगा कि कानून व्यवस्था कहां कमजोर है और सुधार के लिए किन कदमों की जरूरत

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