पलामू: पंडवा प्रखंड में शुक्रवार शाम पीसीसी पथ के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के संबोधन को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है.मंत्री ने अपने संबोधन में भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हिंदुत्व की राजनीति पर टिप्पणी की. साथ ही उन्होंने पाटन-छतरपुर, डाल्टनगंज और पांकी विधानसभा क्षेत्रों के जातिगत समीकरणों का भी जिक्र किया. राधाकृष्ण किशोर ने अपने राजनीतिक अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि वह भी एक समय भाजपा के दलदल में फंस गए थे. उन्होंने कहा कि जब उनका टिकट काट दिया गया, तब उन्हें होश आया.
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20% लोग कर रहे राज
मंत्री ने कहा कि देश में करीब 80 प्रतिशत आबादी के ऊपर आज भी 20 प्रतिशत लोग राज कर रहे हैं. उन्होंने इस संदर्भ में हिंदुत्व की राजनीति और जातीय समीकरण का जिक्र किया.पाटन-छतरपुर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए मंत्री ने कहा कि यदि यह सीट सामान्य हो जाए तो ब्राह्मण और राजपूत चुनाव लड़ेंगे और तब वे हिंदुत्व को नहीं, बल्कि अपनी जाति को देखकर वोट करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि पाटन-छतरपुर में आरक्षण होने के कारण कुछ लोग मजबूरी में भाजपा को वोट करते हैं.
डाल्टनगंज और पांकी का उदाहरण
मंत्री ने अपने तर्क को समझाने के लिए डाल्टनगंज और पांकी विधानसभा क्षेत्र का भी जिक्र किया.उन्होंने कहा कि सीट आरक्षित होने के कारण छतरपुर विधानसभा में लोग मजबूरी बस मोदी के नाम पर तो वोट करते हैं.यही लोग डाल्टनगंज में लोग भाजपा के आलोक चौरसिया की जगह केएन त्रिपाठी को बेहतर उम्मीदवार बताते हैं. वहीं पांकी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अनदेखा कर शशिभूषण मेहता के बजाय फलाना सिंह के समर्थन में नारे लगाए जाते हैं.
विकास के मंच पर जातीय चर्चा पर सवाल
मंत्री पंडवा में पीसीसी पथ के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे. कार्यक्रम का केंद्र सड़क निर्माण और क्षेत्र की विकास योजनाएं थीं. कार्यक्रम के बाद चर्चा हालांकि विकास कार्य से अधिक मंत्री के राजनीतिक और जातीय संदर्भ वाले बयान को लेकर होने लगी.
सवाल यह है कि विकास योजना के उद्घाटन के मंच से एससी, एसटी, ओबीसी, ब्राह्मण और राजपूत जैसे जातीय समूहों के चुनावी व्यवहार की चर्चा क्यों हुई. पाटन-छतरपुर से लेकर डाल्टनगंज और पांकी तक के चुनावी समीकरणों को एक ही संबोधन में जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी.
मंत्री का बयान ऐसे समय में सामने आया है जब झारखंड की राजनीति में जातीय प्रतिनिधित्व,आरक्षण और हिंदुत्व जैसे मुद्दे लगातार राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं ऐसे में सरकारी योजना के उद्घाटन मंच से इन मुद्दों पर की गई टिप्पणी ने कार्यक्रम को राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है.


