झारखंड: कोर्ट में गवाही देने के लिए समय पर नहीं पहुंचने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। अब ऐसे पुलिसकर्मियों का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा और यह देखा जाएगा कि उनकी लापरवाही के बाद विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई। डीजीपी कार्यालय की ओर से राज्य के सभी एसएसपी, एसपी और अलग अलग विशेष इकाइयों के अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। पुलिस मुख्यालय ने जनवरी 2024 से अगस्त 2026 तक का रिकॉर्ड मांगा है। यानी करीब ढाई साल के दौरान अदालत में गवाही से गैरहाजिर रहने वाले पुलिसकर्मियों की पूरी जानकारी अब मुख्यालय के पास पहुंचेगी।
Highlights:
कोर्ट में गवाही से क्यों जरूरी है पुलिसकर्मियों की मौजूदगी?
किसी आपराधिक मामले की जांच के बाद जब मामला अदालत तक पहुंचता है तो पुलिस की भूमिका सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी या चार्जशीट दाखिल करने तक खत्म नहीं हो जाती। जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी और दूसरे संबंधित पुलिसकर्मी कई मामलों में अदालत के सामने गवाही देते हैं। उनकी मौजूदगी मुकदमे की सुनवाई के लिए जरूरी होती है। लेकिन जब पुलिस अधिकारी या गवाह तय तारीख पर अदालत में नहीं पहुंचता, तो सुनवाई प्रभावित हो सकती है और मामले की प्रक्रिया आगे खिसक सकती है।
पुलिस मुख्यालय इसी समस्या को लेकर अब रिकॉर्ड की समीक्षा करना चाहता है। मुख्यालय यह पता लगाएगा कि जनवरी 2024 से अगस्त 2026 के बीच कितने पुलिस अधिकारी और कर्मचारी अदालत में गवाही देने के लिए समय पर नहीं पहुंचे और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
सीपीएमएस से रखी जा रही है कोर्ट प्रोसेस पर नजर
झारखंड पुलिस इस पूरी प्रक्रिया के लिए सीपीएमएस यानी कोर्ट प्रोसेस मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है। इसका मकसद गवाहों और साक्ष्यों की अदालत में समय पर मौजूदगी सुनिश्चित करना है। सिस्टम के जरिए कोर्ट से जुड़े मामलों की प्रक्रिया और गवाही से संबंधित जानकारी को मैनेज किया जाता है।
अब पुलिस मुख्यालय यह भी देखना चाहता है कि इस सिस्टम के बावजूद किन मामलों में पुलिसकर्मी अदालत में गवाही के लिए नहीं पहुंचे। इसके साथ ही ऐसे मामलों में संबंधित पुलिस अधिकारियों ने क्या प्रशासनिक या दंडात्मक कदम उठाए, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है।
28 सितंबर को होगी समीक्षा बैठक
इस पूरे मामले को लेकर 28 सितंबर को एक समीक्षा बैठक बुलाई गई है। आईजी प्रोविजन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। इसमें राज्य के सभी जिलों और पुलिस इकाइयों के एसएसपी और एसपी को शामिल होना होगा।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अदालत में गवाही के लिए नहीं पहुंचने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा तय फॉर्मेट में तैयार किया जाए। यह रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजनी होगी और संबंधित अधिकारियों को बैठक में इसी अपडेटेड रिपोर्ट के साथ मौजूद रहना होगा।
24 घंटे में भेजनी होगी रिपोर्ट
पुलिस मुख्यालय ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए समय सीमा भी तय की है। सभी जिलों और संबंधित पुलिस इकाइयों के एसएसपी और एसपी को गवाही में शामिल नहीं होने वाले पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई की जानकारी 24 घंटे के भीतर मुख्यालय को भेजनी होगी।
इसके बाद 28 सितंबर की बैठक में इन रिपोर्टों की समीक्षा की जाएगी। यानी अब सिर्फ यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि कोई पुलिसकर्मी अदालत में गवाही देने नहीं पहुंचा। मुख्यालय यह भी जानना चाहता है कि उसकी गैरहाजिरी के बाद संबंधित स्तर पर क्या कार्रवाई की गई।
ढाई साल के रिकॉर्ड से सामने आएगी पूरी तस्वीर
जनवरी 2024 से अगस्त 2026 तक का रिकॉर्ड मांगे जाने के बाद अब पुलिस मुख्यालय के पास करीब ढाई साल की जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि इस अवधि में कितने पुलिसकर्मी अदालत में गवाही के लिए समय पर नहीं पहुंचे और कितने मामलों में उनके खिलाफ विभागीय या प्रशासनिक कार्रवाई हुई।
28 सितंबर की समीक्षा बैठक में जिलों और विशेष इकाइयों से मिली रिपोर्ट के आधार पर इस पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। फिलहाल पुलिस मुख्यालय ने सभी संबंधित अधिकारियों से रिकॉर्ड और कार्रवाई का ब्योरा तैयार कर भेजने को कहा है।


