कोडरमा के डोमचांच प्रखंड में बिजली संकट ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। यहां पिछले 36 घंटे से बिजली की आपूर्ति लगातार प्रभावित बताई जा रही है। बिजली कटौती का असर अब सिर्फ घरों की रोशनी और रोजमर्रा के कामों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कई इलाकों में पेयजल संकट भी गहरा गया है। पुरनाडीह पंचायत के नवादा गांव में स्थिति और गंभीर है, क्योंकि यहां पेयजल के लिए ग्रामीणों का मुख्य सहारा डीप बोरिंग है। यह डीप बोरिंग बिजली से चलती है। ऐसे में जब बिजली की आपूर्ति बाधित होती है तो पानी की व्यवस्था भी ठप हो जाती है। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
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36 घंटे से बिजली की आंख-मिचौली
डोमचांच प्रखंड में पिछले 36 घंटे से बिजली की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक इस दौरान बिजली की आपूर्ति लगातार बाधित रही। कभी बिजली आती है तो कुछ देर बाद चली जाती है। वहीं नवादा गांव में पिछले करीब 12 घंटे से पूरी तरह ब्लैकआउट की स्थिति बताई जा रही है। लंबे समय तक बिजली नहीं रहने के कारण लोगों के घरों से लेकर जरूरी कामों तक पर इसका असर पड़ा है।
बिजली की इस कटौती ने ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की उस निर्भरता को भी सामने ला दिया है, जहां बिजली सिर्फ पंखे, बल्ब या मोबाइल चार्ज करने के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि पानी की व्यवस्था भी इसी पर टिकी हुई है। नवादा गांव में डीप बोरिंग बिजली से संचालित होने के कारण बिजली जाते ही पानी की समस्या शुरू हो जाती है।
बिजली गई तो पानी का संकट भी गहराया
पुरनाडीह पंचायत के नवादा गांव में पेयजल के लिए डीप बोरिंग ही एकमात्र सहारा बताई जा रही है। ऐसे में बिजली की लगातार कटौती का सीधा असर पानी की उपलब्धता पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के सामने पीने के पानी का इंतजाम करना मुश्किल हो गया है।
बिजली की समस्या कुछ घंटों की हो तो लोग किसी तरह व्यवस्था कर लेते हैं, लेकिन जब यह सिलसिला लंबे समय तक जारी रहे तो परेशानी बढ़ जाती है। नवादा गांव में भी यही स्थिति बताई जा रही है। बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के कारण डीप बोरिंग नहीं चल पा रही है और लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के काम प्रभावित
बिजली संकट का असर गांव के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। बिजली नहीं रहने के कारण पढ़ने-लिखने में परेशानी हो रही है। इसके अलावा मोबाइल चार्जिंग की समस्या भी लोगों के सामने है। ग्रामीणों के मुताबिक बिजली के बिना रोजमर्रा के कई जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं।
रात में बिजली नहीं रहने से अंधेरे की समस्या अलग है। लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने के कारण लोगों को रात भी परेशानी के बीच गुजारनी पड़ रही है। गांव में बिजली की जरूरत सिर्फ घरेलू सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि कई जरूरी सेवाओं से जुड़ी हुई है। ऐसे में लगातार बिजली कटौती का असर कई स्तरों पर दिखाई दे रहा है।
कई बार सूचना देने का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की समस्या को लेकर विभाग को कई बार सूचना दी गई है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि बिजली व्यवस्था जल्द ठीक नहीं हुई तो पानी की समस्या और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों के सामने एक तरफ बिजली की समस्या है तो दूसरी तरफ इसी बिजली के जरिए चलने वाली डीप बोरिंग बंद होने से पेयजल का संकट खड़ा हो गया है। यही वजह है कि लोग जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
नियमित बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग
ग्रामीणों ने बिजली विभाग से जल्द व्यवस्था दुरुस्त करने और नियमित बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली की आपूर्ति सामान्य होने से ही डीप बोरिंग दोबारा चल सकेगी और पानी की समस्या से राहत मिल सकेगी।
फिलहाल डोमचांच के नवादा गांव में बिजली और पानी का संकट एक-दूसरे से जुड़ गया है। पिछले 36 घंटे से जारी बिजली समस्या ने लोगों के रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित किया है। करीब 12 घंटे के ब्लैकआउट के बाद ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। अब ग्रामीणों की नजर बिजली विभाग की कार्रवाई पर है कि बिजली व्यवस्था कब तक सामान्य होती है और लोगों को जल संकट से कब राहत मिलती है।


