न्यूज डेस्क: नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मामले की अगली सुनवाई अब शुक्रवार 29 मई को होगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि संबंधित संस्थाओं ने अब तक कोई सबक नहीं सीखा है। कोर्ट ने कहा कि पहले भी इस तरह के मामलों में आदेश दिए गए थे, कमेटियां बनाई गई थीं और सिफारिशें भी स्वीकार की गई थीं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नजर नहीं आ रहा है।
याचिका में NTA को भंग करने की मांग
यह याचिका फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं के लिए NTA को भंग कर एक स्वतंत्र और स्वायत्त परीक्षा निकाय बनाया जाए। इसके साथ ही परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित यानी कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) कराने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बार-बार पेपर लीक और अनियमितताओं की घटनाओं से छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
मॉनिटरिंग कमेटी पर कोर्ट ने मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने NTA से पूछा कि 2024 के NEET पेपर लीक विवाद के बाद बनाई गई मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर कितना अमल किया गया। अदालत ने NTA को निर्देश दिया कि वह विस्तृत काउंटर एफिडेविट दाखिल कर पूरी जानकारी दे। कोर्ट ने यह भी पूछा कि पहले गठित मॉनिटरिंग कमेटी अब क्या कर रही है और उसकी रिपोर्टों पर क्या कार्रवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष को भी निर्देश दिया कि अदालत के आदेशों के पालन को सुनिश्चित करें। कोर्ट ने साफ कहा कि उसका फोकस केवल परीक्षा कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है।
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