नई दिल्ली : दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस सफ़दरजंग अस्पताल ले गई, जहां फिलहाल वह इलाजरत हैं. अस्पताल ले जाने के कई घंटों बाद अस्पताल प्रशासन का बयान सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि लंबे समय तक उपवास करने के कारण सोनम वांगचुक को हल्की कमज़ोरी और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) की शिकायत है. फ़िलहाल उनकी हालत स्थिर है और सभी अन्य स्वास्थ्य मानक सामान्य हैं.
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कमज़ोरी और पानी की हल्की कमी
सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ चारु बंबा ने कहा, “सोनम वांगचुक शनिवार सुबह क़रीब 7:40 बजे अस्पताल पहुँचे. लंबे समय से उपवास करने की वजह से उन्हें थोड़ी कमज़ोरी है और शरीर में पानी की हल्की कमी है.”
सभी वाइटल पैरामीटर सामान्य
डॉ चारु के मुताबिक़, “वांगचुक के सभी वाइटल पैरामीटर सामान्य हैं. उनकी लगातार निगरानी की जा रही है और उनका इलाज जारी है. वह पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत स्थिर है. अस्पताल पहुँचने पर सबसे पहले इमर्जेंसी मेडिसिन विभाग ने उनका इलाज किया. इसके बाद उन्हें मेडिसिन विभाग में भर्ती किया गया.”
अस्पताल प्रशासन ने बताया, “वांगचुक पूरी तरह होश में हैं. शरीर में पानी की कमी के कारण उनके इलेक्ट्रोलाइट स्तर पर असर के संकेत मिले हैं. इसी वजह से उन्हें कुछ समय तक अस्पताल में निगरानी में रखा जाएगा. पहले इसे ठीक किया जाएगा और फिर उनकी हालत की दोबारा जांच की जाएगी.”
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा था
बता दें कि शनिवार सुबह सोनम वांगचुक को जंतर मंतर स्थित धरनास्थल से सफदरजंग अस्पताल ले जाने पर डीसीपी नई दिल्ली की ओर से एक्स पर बताया गया था कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की सलाह के बाद सोनम वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है.
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने बीते 15 जुलाई को मामले से संबंधित जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार को सोनम वांगचुक की सेहत पर नज़र रखने के लिए निर्देश दिया था. यह पहली बार था, जब किसी अदालत ने इस प्रदर्शन में दखल दिया था. अदालत के निर्देश का मतलब था कि अगर उनकी हालत ख़राब होती है तो उन्हें अस्पताल ले जाया जा सकता है.’
दिल्ली हाई कोर्ट की दो जजों की बेंच ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए, जिसमें वांगचुक की हालत गंभीर होने से पहले उन्हें जबरन भोजन दिए जाने की मांग की गई थी, अधिकारियों से कहा कि वे डॉक्टरों की राय के आधार पर ज़रूरी क़दम उठाएं.


