रांची: झारखंड के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) राजीव रंजन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। रविवार सुबह उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अपना इस्तीफा सौंप दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने इस्तीफे में निजी कारणों का हवाला दिया है। राजीव रंजन लंबे समय से झारखंड सरकार के महाधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार के प्रमुख कानूनी सलाहकार की भूमिका निभाई। सरकार से जुड़ें कई महत्वपूर्ण मामलों में उन्होंने अदालत में राज्य का पक्ष मजबूती से रखा और कानूनी रणनीति तैयार करने में अहम योगदान दिया।
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महाधिवक्ता का पद क्यों है महत्वपूर्ण?
महाधिवक्ता किसी भी राज्य का सर्वोच्च विधिक अधिकारी होता है। यह पद राज्य सरकार को कानूनी सलाह देने और विभिन्न न्यायालयों में सरकार का पक्ष रखने के लिए जिम्मेदार होता है। संविधान के तहत यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद माना जाता है। ऐसे में इस पद से इस्तीफा देना प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजीव रंजन के इस्तीफे के बाद अब राज्य सरकार को नए महाधिवक्ता की नियुक्ति करनी होगी। सूत्रों के अनुसार सरकार जल्द ही नए एडवोकेट जनरल के नाम की घोषणा कर सकती है। फिलहाल राजनीतिक और कानूनी हलकों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि सरकार इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए किसे चुनती है।
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