नई दिल्ली : केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने सोमवार को कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई सूचना का अधिकार क़ानून (आरटीआई एक्ट) के तहत “पब्लिक अथॉरिटी” नहीं है. आयोग का कहना है बीसीसीआई न तो सरकार के स्वामित्व में है, न उसके नियंत्रण में है और न ही इसे सरकार से बड़े स्तर पर वित्तीय मदद मिलती है.
इसे भी पढ़ें : अमेरिका के सैन डिएगो में मस्जिद में हुई गोलीबारी में तीन लोगों की मौत, अधिकारियों ने ये कहा
आयोग ने उस अपील को ख़ारिज कर दिया जिसमें यह जानकारी मांगी गई थी कि बीसीसीआई किन प्रावधानों और अधिकारों के तहत भारत का प्रतिनिधित्व करता है और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए खिलाड़ियों का चयन करता है. यह आरटीआई साल 2017 में गीता रानी ने दायर की थी.
इसमें यह भी सवाल पूछा गया था कि केंद्र और राज्य की सरकारें किस अधिकार के तहत बीसीसीआई को टूर्नामेंट के आयोजन के लिए नेशनल स्टेडियम, पुलिस वगैरह मुहैया कराती हैं. सीआईसी ने कहा कि बीसीसीआई तमिलनाडु सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत एक निजी स्वायत्त संस्था है और इसकी स्थापना संविधान, संसद, राज्य विधानसभा या किसी सरकारी अधिसूचना के ज़रिए नहीं हुई है.
सूचना आयुक्त पी आर रमेश ने अपने आदेश में कहा, “बीसीसीआई को आरटीआई एक्ट की धारा 2(एच) के तहत ‘पब्लिक अथॉरिटी’ नहीं माना जा सकता और इस क़ानून के प्रावधान इस पर लागू नहीं होते.”




