रांची: झारखंड सरकार राज्य की सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है। हेमंत सोरेन सरकारी स्कूल छात्राओं को नि:शुल्क सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने की योजना पर तेजी से काम कर रही है, जिससे लाखों छात्राओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
यह योजना सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद तैयार की जा रही है। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सरकारी स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त सेनेटरी पैड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही तीन महीने के भीतर उठाए गए कदमों की रिपोर्ट भी मांगी गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए झारखंड सरकार समयबद्ध तरीके से योजना लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित योजना के तहत राज्य की करीब 12 से 13 लाख छात्राओं को लाभ मिलने की संभावना है। योजना में कक्षा 6 से 12वीं तक की छात्राओं को शामिल करने का प्रस्ताव है। इसके तहत प्रत्येक छात्रा को हर महीने पांच से छह सेनेटरी पैड नि:शुल्क दिए जाएंगे।
बजट प्रावधान और विभागीय बैठकें
सरकार इस योजना को लागू करने के लिए बजट में अलग से राशि का प्रावधान करने की प्रक्रिया में है। इसे लेकर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में सेनेटरी पैड की खरीद, गुणवत्ता मानक, वितरण व्यवस्था और निगरानी प्रणाली जैसे पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई है। सरकार सेनेटरी पैड वितरण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए यूनिसेफ से सहयोग लेने पर भी विचार कर रही है। यूनिसेफ पहले से ही माहवारी स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रम चला रहा है। सरकार का मानना है कि यूनिसेफ के अनुभव से योजना को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा। इसके अलावा अन्य राज्यों में लागू ऐसी योजनाओं की कार्यप्रणाली का भी अध्ययन किया जा रहा है।
अभी सीमित स्कूलों में ही सुविधा
फिलहाल झारखंड के सरकारी स्कूलों में सेनेटरी पैड वितरण की कोई व्यापक योजना लागू नहीं है। अभी यह सुविधा केवल राज्य के 203 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में उपलब्ध है। अन्य सरकारी स्कूलों में छात्राओं को सेनेटरी पैड की नियमित व्यवस्था नहीं मिल पा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना को अगले शैक्षणिक सत्र से लागू कर दिया जाए। इससे न केवल छात्राओं की माहवारी स्वच्छता बेहतर होगी, बल्कि स्कूल में उनकी उपस्थिति और पढ़ाई पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।


