Thursday, October 29, 2026

राजनीति ने बदल दी भोजपुरी स्टार्स की कहानी

बिहार: बिहार व बॉलीवुड समेत पूरे देश में अपनी गायकी और फैन फॉलोइंग के जरिए छा जाने वाले भोजपुरी सिंगर, अभिनेता, जो कभी एक के बाद एक हिट गाने देते थे, फिल्मों से लेकर स्टेज पर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करते थे, आज वही चेहरे राजनीति में भी खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं. बात यदि बिहार विधानसभा चुनाव की करें तो यहां राजनीतिक बयानबाज़ी के कारण कई भोजपुरी स्टार्स आमने-सामने नज़र आ रहे हैं। पवन सिंह, खेसारी लाल यादव, निरहुआ, रवि किशन हों या फिर मनोज तिवारी. कई मंचों पर इन कलाकारों ने एक दूसरे को खूब सम्मान दिया तो वहीं कई मौकों पर वह एक दूसरे के लिए बड़े भाई, छोटे भाई भी कहते नजर आए. लोगों ने इनकी दोस्ती, हिट गानों के साथ साथ इनकी जुगलबंदी को भी खूब प्यार दिया, उसे पसंद किया. लेकिन अब जब बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान का समय नजदीक आता जा रहा है तो इन सितारों के बीच मतभेद और एक दूसरे के खिलाफ बयानबाज़ी तेज हो गए हैं.

 रवि किशन को मिली जान से मारने की धमकी

यह कहानी हम आपको इसलिए बता रहे हैं क्योंकि पिछले दिनों भोजपुरी अभिनेता और गोरखपुर से सांसद रवि किशन के मैनेजर को उनके फोन कॉल पर जान से मारने की धमकी मिली है, इस वायरल ऑडियो में एक व्यक्ति जो अपने आप को खेसारी लाल यादव का समर्थक बताता है, वह मैनेजर को जान से मारने की धमकी देता है, उसके खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करता है. कॉल करने वाले ने खुद को अजय कुमार यादव बताया और कहा कि राम मंदिर की जगह कॉलेज होना चाहिए था। उसने यह भी कहा कि अगर रवि किशन वहां आये तो वह उन्हें मार देगा और इसे फांसी जैसा मामला बना देगा। कॉल में अजय ने यह साफ कहा कि अभी तुम मुझे नहीं जानते, मैं जवानीया बिहार से हूँ, चार दिन बाद आ जाऊँगा तो मार दूँगा, मैं खुद भी मरने के लिए तैयार हूँ पर उन्हें गोली मारूंगा। वह यह भी बोले कि रवि किशन ने यादव समाज के बारे में गलत बात कही थी, इसलिए यह गुस्सा है।

मैनेजर का कहना है कि रवि किशन ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं, लेकिन कॉल करने वाले ने रिकॉर्डिंग होने का दावा किया है और वह रिकॉर्ड उनको दिखा भी सकता है। मैनेजर ने स्पष्ट किया कि वे मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और सुरक्षा के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने पुलिस को सूचित करने और कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है ताकि धमकी देने वाले का पता चलाकर कार्रवाई की जा सके।

भोजपुरी कलाकारों के विवादास्पद

ऐसा नहीं है कि भोजपुरी कलाकारों के विवादास्पद होने का यह पहला मामला है, इससे पहले दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भी बयान दिया कि जो भगवान राम का विरोध करता है, वो कभी किसी का नहीं हो सकता। इस बयान से न केवल सोशल मीडिया पर खूब हंगामा हुआ, बल्कि बाद में मनोज तिवारी को अपने बयान को लेकर सफाई भी देनी पड़ी। माना जा रहा है कि मनोज तिवारी का इशारा कहीं न कहीं छपरा विधानसभा सीट से राजद उम्मीदवार खेसारी लाल यादव की ओर था। खेसारी लाल यादव ने RJD यानी (राष्ट्रीय जनता दल) से जुड़ने की खबरों के बाद निरहुआ और अन्य स्टार्स के बीच राजनीतिक मतभेद पैदा कर दिया है।
एक समय था जब खेसारी, निरहुआ, रवि किशन, पवन सिंह और मनोज तिवारी साथ में स्टेज पर आते थे और दर्शकों को एंटरटेन करते थे। आज वही लोग कौन असली सनातनी है और कौन राम का समर्थक है जैसे सवालों में उलझे हैं। भोजपुरी इंडस्ट्री के चर्चित कलाकारों के बीच पनपे इस इस नई लड़ाई ने यह साफ कर दिया है कि इस चुनावी मौसम में अब गाने नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक बयान हिट हो रहे हैं, और दोस्ती की जगह पार्टी लाइन वाले बयानों ने ले ली है.

राम मंदिर का विरोधी यद्दुमुल्लाह 

कभी निरहुआ और खेसारी एक-दूसरे के बेहद करीबी दोस्त माने जाते थे। दोनों ने मिलकर कई स्टेज शो किए और एक-दूसरे की तारीफ़ में खुलकर बातें भी कीं। लेकिन अब बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सबकुछ बदल गया। जब खबर आई कि खेसारी लाल यादव RJD के साथ राजनीति में कदम रख रहे हैं, तो निरहुआ का रिएक्शन काफी अलग था। उन्होंने कहा कि जो खुद को यादुवंशी कहता है, वह अगर राम मंदिर का विरोध करता है, तो वह यदुवंशी नहीं, यद्दुमुल्लाह’ है। यह बयान जैसे ही सोशल मीडिया पर आया, लोगों ने इसे सीधा खेसारी लाल यादव पर निशाना मान लिया। इससे पहले रवि किशन ने भी खेसारी पर निशाना साधते हुए कहा था कि वो असली सनातनी नहीं हैं। रवि किशन और निरहुआ दोनों ही बीजेपी से जुड़े हुए हैं, जबकि खेसारी लाल यादव के RJD से जुड़ने की खबर ने राजनीतिक माहौल और गर्म कर दिया है। माना जा रहा है कि खेसारी के राजनीति में आने से बीजेपी के भोजपुरी स्टार्स को यह अच्छा नहीं लगा।

अगर पुराने दिनों की बात करें, तो खेसारी लाल यादव वही स्टार हैं जिनके गाने लहंगा उठा देब रिमोट से, ठोके थारी में जइबू और रिमोट से झूम ले जैसे गाने लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। इन गानों ने करोड़ों व्यूज़ बटोरे और स्टेज पर उनकी लोकप्रियता बढ़ाई। लेकिन राजनीति में कदम रखने के बाद, इन पुराने गानों और उनकी छवि को लेकर भी विवाद बढ़ गया। कुछ लोग कह रहे हैं कि जो अपने गानों से समाज को गलत संदेश देता रहा, वह अब समाज सुधार की बात कैसे कर सकता है? वहीं, खेसारी के फैंस का कहना है कि उन्होंने मेहनत से नाम कमाया है और अब उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

रिश्तों में  बढ़ती कड़वाहट

मनोज तिवारी, रवि किशन, निरहुआ और पवन सिंह . ये चारों कभी भोजपुरी सिनेमा के चार स्तंभ माने जाते थे। लेकिन अब राजनीति की वजह से उनके रास्ते अलग-अलग हो चुके हैं। मनोज तिवारी दिल्ली से बीजेपी सांसद हैं, रवि किशन गोरखपुर से सांसद हैं, निरहुआ आजमगढ़ से सांसद हैं, जबकि खेसारी लाल यादव अब RJD के टिकट पर छपरा से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। पवन सिंह भी पहले लोकसभा चुनाव के समय नाराज दिखे लेकिन विधानसभा चुनाव आते ही बीजेपी में फिर से शामिल होकर चुनाव लड़ने की तैयारी में थे लेकिन अचानक उनकी पत्नी ज्योति सिंह ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया जिससे पवन सिंह के चुनाव लड़ने और राजनीतिक पारी शुरू करने पर ग्रहण लग गया. इन सबके बीच रिश्तों में कड़वाहट इतनी बढ़ चुकी है कि अब स्टेज शो या इवेंट्स में ये एक-दूसरे के नाम तक नहीं लेते।

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स जैसे ट्विटर और यूट्यूब पर इस विवाद की खूब चर्चा हो रही है। कई लोग का मानना है कि भोजपुरी इंडस्ट्री अब राजनीति की रणभूमि बन चुकी है और राम के नाम पर लोग एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाज़ी कर रहे हैं। पहले जहां गानों से लोगों का मनोरंजन होता था, अब बयानबाज़ी से सुर्खियां बटोरना मुख्य मुद्दा बन गया है।

राजनीति के बीच अब एक नया दौर शुरू

कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सब केवल बयानबाज़ी नहीं है, बल्कि पब्लिसिटी का हिस्सा भी है। चुनाव नज़दीक हैं, और हर स्टार चाहता है कि वह सुर्खियों में रहे। खेसारी के RJD से जुड़ने की खबर ने उन्हें चर्चा में ला दिया, तो बाकी स्टार्स ने भी अपनी राजनीतिक पहचान और धार्मिक छवि को बचाने के लिए जवाबी बयान दिए।
भोजपुरी इंडस्ट्री हमेशा से राजनीति के करीब रही है। कई कलाकार सांसद बन चुके हैं और अब नए चेहरे भी राजनीति में सक्रिय हो रहे हैं। लेकिन इस बार जो बात सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही है, वह यह है कि दोस्ती की जगह अब बयानबाज़ी ने ले ली है। पहले जहाँ भोजपुरी स्टार्स अपनी एकता के लिए जाने जाते थे, अब उनके बीच की दरार सबके सामने है।

यह पूरा मामला यह दिखाता है कि भोजपुरी सिनेमा और राजनीति के बीच अब एक नया दौर शुरू हो गया है, जिसमें पुराने दोस्त अब एक दूसरे के विरोधी बनते जा रहे हैं। लोगों के लिए यह दोनों ही तरह के मनोरंजन का हिस्सा बन गया है . एक तरफ़ गाने और स्टेज शो, तो दूसरी तरफ़ बयानबाज़ी और राजनीतिक विवाद। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में ये सितारे अपने मतभेदों को सुलझाते हैं या फिर इस बयानबाज़ी का दौर और बढ़ता है।

एयर नाऊ स्पेशल

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