नई दिल्ली: सोमवार से संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ. सत्र के पहले दिन सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति देखने को मिली. विपक्ष सोनम वांगचुक के अनशन, NEET-UG पेपर लीक, SIR, महंगाई और राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने में लगा है, जबकि सरकार भी अपने एजेंडे के साथ जवाब देने के लिए तैयार है.
Highlights:
इसे भी पढ़ें : राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे ने उठाया CJP प्रदर्शन मामला, प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज पर केजरीवाल बोले, “गलत”
संसद सरकार का नोटिस बोर्ड नहीं
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने अयोध्या में राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी और नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक जैसे मुद्दों को लेकर सोमवार को सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि संसद विधेयकों की जानकारी देने और उन्हें पारित कराने के लिए सरकार का नोटिस बोर्ड नहीं हो सकती.
धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो के लगे नारे
लोकसभा में सोमवार को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और उससे जुड़े विवाद में छात्रों की मौत का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. कांग्रेस सांसदों ने इन छात्रों को श्रद्धांजलि देने की भी मांग की. इस बीच कई सांसद नारे लगाते हुए स्पीकर की सीट के पास पहुंच गए. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनसे शांत रहने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की. हालांकि हंगामा नहीं रुकने पर सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई.
बार बार लोकसभा की कार्यवाही स्थगित
12 बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो इसके बाद NEET पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावे चोरी के मुद्दे पर विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में जोरदार हंगामा किया. लगातार नारेबाजी और विरोध के चलते सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी. विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सांसदों के जोरदार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई. तीन बार स्थगित करने के बाद भी सदन में व्यवस्था नहीं बन सकी, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही आखिरकार दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.
प्रधानमंत्री की बातें घिसी-पिटी : कांग्रेस
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद के मानसून सत्र से पहले दिए गए संबोधन पर निशाना साधा है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पीएम ने एक बार फिर वही पुरानी बातें दोहराईं, लेकिन राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी, NEET-UG पेपर लीक और विपक्षी दलों को तोड़ने के आरोप जैसे अहम मुद्दों पर कुछ नहीं कहा. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र और संविधान के संघीय ढांचे को कमजोर करने से जुड़े सवालों पर भी चुप्पी साधे रखी.


