नई दिल्ली : फरीदाबाद कार धमाका मामले में जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस मॉड्यूल में डॉक्टर, प्रोफेसर और शिक्षित महिलाएं शामिल थीं, जो पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे। पुलिस और खुफिया एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क मेडिकल प्रोफेशन और शैक्षणिक संस्थानों की आड़ में देशभर में आतंकी साजिश रच रहा था।
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दो साल से तैयार हो रही थी साजिश
जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी डॉ. शाहीन शाहिद पिछले दो सालों से विस्फोटक सामग्री जमा कर रही थी। शाहीन ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर देश के कई शहरों में धमाकों की योजना बना रही थी। फरीदाबाद से ऑपरेट हो रहे इस वाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल के तार हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से जुड़े हैं।
अल फलाह यूनिवर्सिटी से चल रहा था नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, यह मॉड्यूल हरियाणा की अल फलाह यूनिवर्सिटी से संचालित हो रहा था। जांच में सामने आया कि यहां रहकर शाहीन और उसके साथी डॉक्टर गुप्त रूप से आतंकी गतिविधियों की योजना बनाते थे। यह मॉड्यूल सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से संपर्क में था।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बुधवार को हरियाणा के मेवात से इश्तियाक नामक एक मौलवी को गिरफ्तार किया है। वह अल फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस के पास किराए के मकान में रह रहा था। तलाशी में उसके घर से 2,500 किलो से अधिक अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम क्लोरेट और सल्फर बरामद हुआ। यह सामग्री बड़े पैमाने पर विस्फोट की तैयारी का संकेत देती है।
कश्मीर से डॉक्टर गिरफ्तार
मंगलवार रात श्रीनगर से डॉ. तजामुल नामक एक और डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया, जो SMHS हॉस्पिटल में कार्यरत था। पुलिस ने बताया कि यह कश्मीर का चौथा डॉक्टर है जो इस मामले में पकड़ा गया है। अब तक कुल 12 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
धमाके से पहले की गुप्त मीटिंग का खुलासा
जांच एजेंसियों को पता चला है कि इस नेटवर्क की नींव 4 अक्टूबर को सहारनपुर में एक शादी समारोह से रखी गई थी। शादी डॉ. आदिल और डॉ. रुकैया की थी। इस समारोह में कुछ खास मेहमान शामिल हुए थे, जिन पर एजेंसियां अब नजर रख रही हैं। शादी के अगले ही दिन यह मॉड्यूल एक्टिव हो गया और पोस्टर, हथियार और फंडिंग का नेटवर्क बनाना शुरू किया। डॉ. आदिल लॉजिस्टिक्स और पैसों का इंतजाम संभालता था। योजना थी कि मेडिकल प्रोफेशन की आड़ में पैसे और हथियारों का लेन-देन किया जाए।
जैश के पोस्टर से मिला पहला सुराग
19 अक्टूबर को कश्मीर के नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगे पाए गए। पुलिस ने तुरंत केस दर्ज किया और 25 अक्टूबर तक 25 से ज्यादा पोस्टर और मिले। 50 अफसरों की टीम ने 60 से ज्यादा CCTV कैमरे खंगाले, जिसमें 31 अक्टूबर को डॉ. आदिल संदिग्ध गतिविधियों में नजर आया। फोन सर्विलांस में उसके पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क की पुष्टि हुई।
विस्फोटक और हथियार बरामद
6 नवंबर को सहारनपुर से डॉ. आदिल को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से AK-47 रायफल, हैंड ग्रेनेड और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई। पूछताछ में उसने बताया कि फरीदाबाद में डॉ. मुजम्मिल के पास और विस्फोटक छिपाए गए हैं। इसके बाद 9 नवंबर को पुलिस ने डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया और उसके घर से भारी मात्रा में बारूद मिला।
शाहीन सईद का पाकिस्तानी कनेक्शन
पूछताछ में सामने आया कि नेटवर्क की सबसे अहम सदस्य डॉ. शाहीन सईद जैश सरगना मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर से सीधे संपर्क में थी। वह पाकिस्तान से ऑनलाइन निर्देश ले रही थी और भारतीय डॉक्टरों के जरिए आतंकी योजनाओं को अंजाम देने की कोशिश कर रही थी।
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फंडिंग और भर्ती का जाल
एजेंसियों का कहना है कि यह मॉड्यूल छात्रों और मेडिकल प्रोफेशनल्स को धार्मिक विचारधारा के नाम पर प्रभावित कर भर्ती कर रहा था। नेटवर्क सोशल मीडिया और यूनिवर्सिटी कैंपस के जरिए युवाओं को जोड़ता था और धीरे-धीरे उन्हें हथियारों और फंडिंग चैनल में शामिल करता था।
सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता
इस मामले ने देशभर की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। एनआईए, जम्मू-कश्मीर पुलिस और हरियाणा एटीएस की संयुक्त टीम इस मॉड्यूल की जड़ें तलाश रही है। फिलहाल सभी 12 गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक धमाके तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में आतंकी संगठनों की नई रणनीति वाइट कॉलर टेररिज्म का हिस्सा है, जिसमें उच्च शिक्षित लोग प्रोफेशन की आड़ में आतंक फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।


