रांची : राजधानी रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर स्थित मौसीबाड़ी में पिछले नौ दिनों से चल रहे महाप्रभु के पावन प्रवास शनिवार को घुरती रथयात्रा के साथ संपन्न हो गया. नौ दिनों तक अपनी मौसी के घर यानी मौसीबाड़ी में आतिथ्य स्वीकार करने के बाद भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अपने निज मंदिर यानी मुख्य गर्भगृह में वापस लौट आए. घुरती रथ यात्रा के दौरान रथ खींचने को लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े.
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रथ यात्रा के दिन पहुंचे थे मौसीबाड़ी
इससे पहले भगवान जगन्नाथ बहन सुभद्र और बड़े भाई बलराम के साथ बीते 16 जुलाई को आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को रथ यात्रा के मौके पर अपने भव्य रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी के लिए निकले थे. नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में रुकने के बाद भगवान ने अपने भक्तों को विभिन्न रूपों में दर्शन दिए और उनकी हर मनोकामना को आत्मसात किया. मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और हरिनाम संकीर्तन के बीच जब तीनों रथों को वापस खींचा गया, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात वैकुंठ लोक रांची की धरती पर उतर आया हो.
श्रद्धालुओं का उमड़ा हुजूम
घुरती रथ यात्रा के मौके पर झारखंड के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी लाखों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने महाप्रभु के रथ की रस्सी को छूने के लिए लंबी कतारों का इंतजार किया. लोगों का विश्वास था कि रथ की रस्सी को खींचने मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है. जाति, वर्ग और संप्रदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर हर व्यक्ति ने इस महायज्ञ में अपनी आहुति दी.


