रांची : राजधानी रांची में मंगलवार से ऐप आधारित टैक्सी सेवाएं ठप हो गईं हैं। Ola, Uber और Rapido के कैब ड्राइवरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है। ड्राइवरों का कहना है कि कंपनियों की नीतियों से उनकी आमदनी लगातार घटती जा रही है और अब हालात ऐसे बन गए हैं कि खर्च तक निकालना मुश्किल हो गया है।
Highlights:
कंपनियों पर ड्राइवरों के गंभीर आरोप
ड्राइवरों का आरोप है कि कंपनियाँ सिर्फ ग्राहकों के हित में फैसले लेती हैं, जबकि उन्हीं ड्राइवरों की अनदेखी करती हैं जिनकी मेहनत पर यह कंपनियाँ खड़ी हैं। पहले उनकी आमदनी स्थिर रहती थी, लेकिन अब कई नए ऐप आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और बुकिंग में भारी गिरावट आई है। ड्राइवरों ने बताया कि कुछ ऐप कंपनियाँ ₹10 प्रति किलोमीटर तो कुछ सिर्फ ₹8 प्रति किलोमीटर का भुगतान कर रही हैं। इस रकम में ईंधन, वाहन की मेंटेनेंस और अन्य खर्च निकालना लगभग नामुमकिन है।
ड्राइवरों की प्रमुख मांगें
हड़ताल कर रहे ड्राइवरों ने कई मांगें रखी हैं, जिनमें मुख्य हैं:
- वन बुकिंग, वन डिवाइस प्रणाली की वापसी
- किराया दरों में सुधार कर ₹35–₹40 प्रति किलोमीटर करना।
- पुराना कमीशन मॉडल (26%) लागू करना।
- ड्राइवरों के साथ सीधी वार्ता कर पारदर्शी नीति बनाना।
ड्राइवरों का कहना है कि जब तक कंपनियों के प्रतिनिधि आकर उनसे बात नहीं करेंगे और उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
यात्रियों को झेलनी पड़ रही दिक्कतें
हड़ताल का असर पूरे रांची शहर में देखने को मिल रहा है। मंगलवार सुबह से ही ऐप पर टैक्सी या बाइक टैक्सी की बुकिंग न मिलने से लोग परेशान हो गए। ऑफिस, स्कूल-कॉलेज और अस्पताल जाने वाले यात्रियों को खासा दिक्कत का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों ने बताया कि सामान्य किराये पर टैक्सी नहीं मिलने से उन्हें महंगे दाम पर ऑटो या अन्य निजी साधनों का सहारा लेना पड़ा।
प्रशासन की नजर स्थिति पर
हड़ताल के कारण आमजन को हो रही परेशानी को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा है कि वे इस मुद्दे पर कंपनियों और ड्राइवर यूनियनों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश करेंगे ताकि सेवाएं जल्द बहाल हो सकें।
आर्थिक दबाव में ड्राइवर
ड्राइवरों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने से उन पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इसके बावजूद ऐप कंपनियाँ किराया बढ़ाने या कमीशन घटाने को तैयार नहीं हैं। एक ड्राइवर ने कहा, पहले रोजाना 15 से 20 बुकिंग हो जाती थी, अब मुश्किल से 7-8 बुकिंग मिलती हैं। किराया भी इतना कम है कि पेट्रोल-डीजल का खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। परिवार चलाना तो दूर की बात है।
कंपनियों की चुप्पी
हड़ताल पर फिलहाल कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जल्द बातचीत की संभावना है। रांची में कैब सेवाओं की हड़ताल से जहां यात्रियों को परेशानी हो रही है, वहीं ड्राइवरों की आर्थिक दिक्कतें भी सामने आ रही हैं। जब तक कंपनियों और ड्राइवरों के बीच बातचीत से कोई समाधान नहीं निकलता, तब तक यह हड़ताल जारी रहने की संभावना है।


