धनबाद: सांसद ढुल्लू महतो और डुमरी विधायक जयराम महतो के बीच कोयलांचल की राजनीति में अपनी पकड़ व समर्थकों में प्रभाव बनाए रखने को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. ढुल्लू महतो जहां जयराम महतो को कमजोर बता रहे हैं तो वही विधायक ने सांसद पर कोयले के अवैध कारोबार से जुड़े होने का सीधा आरोप लगा दिया. विधायक ने चुनौती के अंदाज में कहा कि सांसद धनबाद अथवा गिरिडीह, जिस जगह को चुनना चाहे, निर्दलीय चुनाव में उतरे. जयराम महतो भी निर्दलीय चुनाव लड़ेगा, परिणाम बता देगा कि कौन मजबूत है और कौन कमजोर?
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दोनों नेताओं के इस बयानबाजी के बाद कोयलांचल की राजनीति उबाल है. सांसद ढुल्लू महतो का आरोप है कि विधायक जयराम महतो घूम घूम कर बड़े-बड़े माफियाओं से मिलकर चंदा उगाही कर रहे हैं. सांसद ने जयराम महतो के उस बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें लाल खंड की बात थी. सांसद ने कहा कि जयराम महतो को यह मालूम होना चाहिए कि 20 साल पहले लोगों में डर, परेशानी, बेचैनी थी. घर का कोई सदस्य अगर लौटने में देर कर देता, तो पूरा परिवार चिंता में डूब जाता था. उन्होंने कहा कि क्या 20 साल पुराने झारखंड को वापस लाने जयराम महतो विधायक बने हैं?
सांसद के बयान पर पलटवार करते हुए जयराम महतो ने कहा कि वह अपना इलाज कराये. विधायक ने ढुल्लू महतो पर कोयला के अवैध कारोबार से जुड़े होने का आरोप लगाया और कहा कि वह जहां से पहले प्रतिनिधि थे, वहां की जनता त्राहिमाम कर रही है, लेकिन इसकी चिंता ढुल्लू महतो जी को नहीं है. वह कोयला के कारोबार में शामिल हो गए हैं. विधायक ने यह भी कहा कि कोयल का चरित्र होता है, खुद जलकर दूसरों के घर को रोशन करना, लेकिन सांसद ढुल्लू महतो, इस चरित्र से बिल्कुल अलग काम करते है.
ढुल्लू महतो ने जयराम महतो पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पूरे झारखंड में घूम-घूमकर बड़े-बड़े माफिया से मिलकर चंदा उठाने का काम कर रहे हैं. जो गरीब और किसान का बेटा झारखंड को विकास की ओर ले जाने का काम कर रहा है, तो जयराम महतो उसका विरोध करते हैं. बाहरी लोगों के विरोध के नाम पर भी पैसा लिया जा रहा है.
इधर डुमरी विधायक जयराम महतो ने भी सांसद ढुल्लू महतो पर पलटवार करते हुए कोयला और कोयलांचल में लगातार हो रही भू-धंसान की घटनाओं को लेकर भी सांसद पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वह मिट्टी से बने हैं और मिट्टी में ही मिल जाएंगे, लेकिन कोयले से नहीं बने हैं. उन्होंने कहा कि कोयलांचल में लगभग आधा दर्जन से अधिक जगहों पर भू-धंसान की घटनाएं हो चुकी हैं. कहीं लोग जमीन के नीचे जा रहे हैं तो कहीं घर-मकान और जमीन धंसान की चपेट में आ रहे हैं. इन घटनाओं के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं.


