न्यूज डेस्क: असम में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है. पिछले 24 घंटों के दौरान बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में 4 और लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद राज्य में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 66 हो गई है. बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बात कर राज्य की स्थिति की जानकारी ली.
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असम सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा शनिवार देर शाम जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई. बाढ़ की वजह से 6 लाख 54 हज़ार से अधिक लोग प्रभावित हैं और सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. एनडीआरएफ की टीमें राज्य के कई कटे हुए और जलमग्न इलाकों में राहत और बचाव अभियान चला रही हैं.
10 ज़िलों के 810 गांव जलमग्न
आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से सबसे अधिक नुक़सान ऊपरी असम के शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट ज़िलों में दर्ज किया गया है. राज्य के 10 ज़िलों के 810 गांव अब भी बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं. प्रभावित लोगों की सहायता के लिए विभिन्न ज़िलों में 274 राहत शिविर एवं राहत केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां करीब 19 हज़ार विस्थापित लोगों ने शरण ले रखी है. इस बीच, असम के मुख्य सचिव रवि कोटा ने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बहाली और पुनर्वास कार्यों में तेज़ी लाने के निर्देश दिए हैं.
असम सीएम ने इन्हें बताया ज़िम्मेदार
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शिवसागर ज़िले में आई भीषण बाढ़ के लिए नगालैंड के मोन ज़िले में हुए कथित ‘बादल फटने’ की घटना को प्रमुख कारण बताया है। गौरतलब है कि असम में हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ से बड़े इलाके प्रभावित होते हैं और लाखों लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ता है.


