Wednesday, July 22, 2026

हजारीबाग हत्याकांड में हुआ बड़ा खुलासा, अंधविश्वास की आड़ में मां ने बेटे के लिए दी बेटी की बलि

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां अंधविश्वास और अवैध संबंधों के जाल में फंसकर एक मां ने अपनी ही 12 वर्षीय बेटी की हत्या करवा दी। पुलिस जांच में हुए खुलासे ने न सिर्फ रिश्तों को शर्मसार किया है, बल्कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास की भयावह सच्चाई को भी उजागर कर दिया है।

पुलिस ने बताई घटनाक्रम की पूरी कहानी

विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुस्मुभा गांव में 24 मार्च को 12 वर्षीय बच्ची की हत्या कर दी गई थी। 25 मार्च की सुबह गांव के मिडिल स्कूल के पीछे बांस झाड़ी में बच्ची का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। शव की हालत देखकर लोगों ने दुष्कर्म की आशंका जताई, जिससे पूरे गांव में आक्रोश का माहौल बन गया। करीब छह दिनों तक चली एसआईटी जांच के बाद पुलिस ने 1 अप्रैल की देर रात प्रेस वार्ता में इस मामले का खुलासा किया। अधिकारियों ने बताया कि हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि बच्ची की मां रेश्मी देवी ने अपने प्रेमी भीम राम और एक कथित भगतिन शांति देवी के साथ मिलकर साजिश रची थी।

अंधविश्वास बनी हत्या की वजह

पुलिस के अनुसार, रेश्मी देवी अपने बेटे की शारीरिक और मानसिक समस्याओं को लेकर परेशान थी। इसी दौरान वह पिछले एक साल से शांति देवी के संपर्क में थी। भगतिन ने उसे विश्वास दिलाया कि परिवार की परेशानियां दूर करने के लिए किसी कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी। अंधविश्वास में डूबी मां ने अपनी ही बेटी को इसके लिए चुन लिया। जांच में यह भी सामने आया कि रेश्मी देवी और भीम राम के बीच पिछले लगभग 10 वर्षों से अवैध संबंध थे।

पति के मुंबई में रहने के कारण दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और यही रिश्ता इस जघन्य अपराध का हिस्सा बन गया। 24 मार्च की रात रामनवमी अष्टमी के दिन रेश्मी देवी अपनी बेटी को लेकर भीम राम और शांति देवी के पास पहुंची। वहां पूजा-पाठ के बाद बच्ची को गांव की बांसबाड़ी में ले जाया गया। पुलिस के अनुसार, वहां पहले से तैयारी की गई थी। भीम राम ने बच्ची का गला दबाया, जबकि मां ने उसके पैर पकड़े। हत्या के बाद घटना को दुष्कर्म जैसा दिखाने की कोशिश भी की गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कानूनी कार्रवाई

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई, जबकि मौत का कारण दम घुटना बताया गया। इस मामले में पुलिस ने भीम राम, रेश्मी देवी और शांति देवी को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों पर बीएनएस की धारा 103(1), 65(2) और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने राज्य के गृह सचिव, डीजीपी और हजारीबाग एसपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। साथ ही देरी से गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाए गए।

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झारखंड में अंधविश्वास की कड़वी सच्चाई

यह घटना कोई पहली नहीं है। झारखंड के गुमला, सिमडेगा, लातेहार, खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों में अंधविश्वास के नाम पर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को निशाना बनाया जाता रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 2022 के बीच 250 से अधिक महिलाओं की हत्या डायन के शक में की गई। वहीं 2014 से 2021 के बीच देशभर में 100 से ज्यादा नरबलि के मामले दर्ज किए गए हैं। विष्णुगढ़ हत्याकांड केवल एक हत्या नहीं, बल्कि अंधविश्वास, अवैध संबंध और मानवता के पतन की भयावह कहानी है। यह घटना समाज को जागरूक करने का संकेत देती है कि अंधविश्वास के खिलाफ ठोस कदम उठाना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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एयर नाऊ स्पेशल

देश का एआई हब बनने की तैयारी कर रहा...

न्यूज़ डेस्क : झारखंड. ये नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयला, लोहे की खदानें, मिनरल्स या शायद आदिवासी संस्कृति....
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