न्यूज डेस्क: भारत में चलने वाली सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ अब विदेशों में एक्सपोर्ट करने की तैयारी जारी है. भारतीय रेलवे और इंजीनियरिंग कंसलटेंसी कंपनी राइट्स लिमिटेड मिलकर इस सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन का एक नया ‘स्टैंडर्ड-गेज’ वर्जन तैयार कर रहा हैं. जिससे दुनिया के ज्यादातर देशों में इसी ट्रैक स्पेसिफिकेशन का इस्तेमाल होता है.
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भारत की वंदे भारत ट्रेनें ‘ब्रॉड-गेज’ पर चलती हैं. लेकिन इसे ग्लोबल मार्केट में एक्सपोर्ट करने के लिए डिजाइन को ‘स्टैंडर्ड-गेज’ में बदला जाएगा. राइट्स के सीएमडी राहुल मिथल ने कहा कि यह प्रोजेक्ट अभी डिजाइनिंग स्टेज पर है. इसकी मंजूरी और विदेशी ऑर्डर मिलते ही इसका प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा.
पड़ोसी देशों ने दिखाई दिलचस्पी
जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के प्रतिनिधिमंडलों ने भारत आकर इन ट्रेनों का जायजा लिया है. इसके साथ ही लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के कुछ देशों ने भी इन ट्रेनों में अपनी रुचि दिखाई है. जिसे लेकर रेलवे अधिकारियों ने कहा कि जब देश की घरेलू मांग पूरी हो जाएगी, तब एक्सपोर्ट पर पूर्ण रुप से ध्यान दिया जाएगा. वहीं शुरुआत में पड़ोसी देशों को फिलहाल के लिए ब्रॉड-गेज ट्रेनें भेजी जा सकती हैं.
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ट्रेन के निमार्ण में 150 करोड़ रुपए लगते
मेक इन इंडिया के द्वारा बनाई गई 16 कोच वाली एक वंदे भारत ट्रेन को बनाने में करीब 130 करोड़ रुपये से 150 करोड़ रुपये की लागत लगती है. ग्लोबल मार्केट की बात करें तो इस हिसाब से यह कीमत बेहद प्रतिस्पर्धी है. वहीं कम लागत और आधुनिक सुविधाओं के कारण यह ट्रेन दुनिया भर के देशों के लिए इंटरसिटी ट्रैवल का एक बेहतरीन और किफायती विकल्प साबित हो सकता है.
वंदे भारत पर भारतीय रेलवे का लक्ष्य
वंदे भारत ट्रेन को लेकर भारतीय रेलवे का लक्ष्य है कि वह साल 2030 तक 800 और 2047 तक 4,500 वंदे भारत ट्रेनें चलाएंगे, जिनमें स्लीपर वर्जन भी शामिल होंगा. FY26 के अंत तक कंपनी का ऑर्डर बुक 9,416 करोड़ रुपये का था और FY27 में इसे 10,000 करोड़ रुपये के पार ले जाने का लक्ष्य है. कंपनी पहले से ही मोजाम्बिक को लोकोमोटिव और बांग्लादेश को 200 रेल कोच सप्लाई करने में जुटी है. वहीं, राइट्स कंपनी का कारोबार भी तेजी से बढ़ रहा है.


