रायपुर : छत्तीसगढ़ की लोक कला पंडवानी को देश और दुनिया में पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का रविवार तड़के निधन हो गया. वह 70 वर्ष की थीं. एम्स रायपुर के अनुसार, तीजन बाई ने रविवार सुबह करीब 3.15 बजे अंतिम सांस ली. वह पिछले कुछ समय से बीमार थीं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. एम्स रायपुर के PRO डॉक्टर लक्ष्मीनारायण चौधरी ने बताया, “तीजन बाई को 27 मई को यहां लाया गया था. उन्हें पार्किंसन से लेकर कई तरह की बीमारियां थीं जिनका इलाज़ चल रहा था.”
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छत्तीसगढ़ के भिलाई के गनियारी गांव में जन्मीं तीजन बाई ने कम उम्र में ही पंडवानी गायन शुरू कर दिया था. महाभारत की कथाओं को अपनी दमदार आवाज, अभिनय और अनूठी प्रस्तुति के साथ मंच पर जीवंत करने की उनकी शैली ने इस लोक कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई.अपने लंबे कलात्मक सफ़र में उन्होंने देश और विदेश में अनेक प्रस्तुतियां दीं. भारतीय लोक कला में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था.
तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के पाटन अटारी गांव में आठ अगस्त 1956 को हुआ था. उनका जन्म छत्तीसगढ़ के जाने-माने लोकपर्व तीज के दिन हुआ था, इसलिए माता-पिता ने उनका नाम ‘तीजन’ रखा. तीजन बाई ने कम उम्र में ही पंडवानी गायन शुरू कर दिया था. सिर्फ़ 13 साल की उम्र में उन्होंने मंच पर अपना पहला प्रदर्शन किया था.




