News Desk: अगर आप रोजमर्रा की खरीदारी में सिक्कों का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए भी अहम है. दिल्ली क्राइम ब्रांच ने Fake Coin Racket का बड़ा खुलासा करते हुए 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में सप्लाई करने वाले कई राज्यों में काम करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य आरोपी समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है.
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आरोपियों के पास से करीब 1 लाख रुपये की वैल्यू के नकली सिक्के बरामद हुए हैं. शुरुआती जांच में पता चला है कि यह गिरोह नकली सिक्कों को कम कीमत पर बेचता था, जिसके बाद उन्हें अलग-अलग इलाकों में असली सिक्कों की तरह चलाने की कोशिश की जाती थी. पुलिस का कहना है कि अगर समय रहते इस नेटवर्क का पर्दाफाश नहीं होता, तो बड़ी संख्या में नकली सिक्के बाजार में पहुंच सकते थे. फिलहाल जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं.
Fake Coin Racket: मेट्रो स्टेशन के पास पुलिस ने ऐसे पकड़ा गिरोह
दिल्ली क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि निहाल विहार का रहने वाला पारस जैन शाम के समय सफेद रंग की टोयोटा एटियोस कार में 20 रुपये के नकली सिक्कों की बड़ी खेप लेकर मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया मेट्रो स्टेशन के पास आने वाला है. सूचना मिलते ही एसीपी राज कुमार और इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की टीम ने इलाके में निगरानी शुरू कर दी. जैसे ही संदिग्ध कार वहां पहुंची, पुलिस ने उसे घेर लिया और चालक पारस जैन को मौके पर ही पकड़ लिया.
कार की तलाशी लेने पर पीछे की सीट से एक काला लैपटॉप बैग और प्लास्टिक के बोरे मिले. इनके अंदर कुल 50 पॉलीथीन पैकेट रखे थे. हर पैकेट में 20 रुपये के 100 नकली सिक्के मौजूद थे. इस तरह पुलिस ने कुल 5,000 नकली सिक्के बरामद किए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 1 लाख रुपये बताई गई. पुलिस ने कार और पारस जैन का आईफोन भी जब्त कर लिया.
Fake Coin Racket कैसे करता था काम
पूछताछ के दौरान पारस जैन ने पुलिस को बताया कि उसने ये नकली सिक्के मोहाली निवासी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह से खरीदे थे. जांच में सामने आया कि उपकार लूथरा इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना था और नकली सिक्के तैयार कर अलग-अलग राज्यों में सप्लाई करता था. पुलिस के मुताबिक गिरोह का तरीका काफी अलग था. 1 लाख रुपये की वैल्यू वाले नकली सिक्के करीब 70 हजार रुपये में बेचे जाते थे.
इसके बाद इन्हें खरीदने वाले लोग बाजार में असली सिक्कों की तरह चलाकर अच्छा मुनाफा कमाने की कोशिश करते थे. जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि अब तक इस गिरोह ने कितनी खेप बाजार में भेजी और किन-किन राज्यों या शहरों तक इनकी सप्लाई हुई.
Fake Coin Racket: चार आरोपी गिरफ्तार, जांच में बड़े खुलासे
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में मोहाली का रहने वाला उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह, उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर का रहने वाला अनुराग पाल उर्फ लंकेश, बिहार के मधुबनी का रहने वाला जनार्दन कुमार चौरसिया उर्फ संतोष और दिल्ली के निहाल विहार का रहने वाला पारस जैन शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, जब पारस जैन पकड़ा गया, उसी दौरान उपकार लूथरा नकली सिक्के बनाने की अपनी फैक्ट्री को सोनीपत से सहारनपुर ले जाने की तैयारी कर रहा था.
लेकिन उससे पहले ही उत्तर प्रदेश पुलिस की एसओजी टीम ने उसे उसके साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया और सहारनपुर जेल भेज दिया. इसके बाद दिल्ली पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर पूछताछ के लिए दिल्ली लेकर आई. पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर अनुराग पाल और जनार्दन कुमार चौरसिया को भी गिरफ्तार कर लिया गया.
Fake Coin Racket: पहले भी कई मामलों में शामिल रह चुका है मुख्य आरोपी
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मुख्य आरोपी उपकार लूथरा का आपराधिक इतिहास भी काफी लंबा है. उस पर दिल्ली, हरियाणा और बिहार में नकली सिक्के बनाने, हत्या और चोरी समेत छह से ज्यादा मामले दर्ज हैं. Fake Coin Racket मामले में पुलिस अब आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड और उनके संपर्कों की भी जांच कर रही है. दिल्ली के लोधी कॉलोनी, केएन काटजू मार्ग, सिविल लाइंस और हरियाणा के हिसार में भी उसके खिलाफ केस दर्ज बताए गए हैं. वहीं पारस जैन के खिलाफ भी हत्या, धोखाधड़ी और लूटपाट जैसे मामलों में पहले से मुकदमे दर्ज हैं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह से जुड़े दूसरे लोग कौन हैं.
Fake Coin Racket में पुलिस की जांच जारी
Fake Coin Racket मामले में क्राइम ब्रांच की जांच अब सिर्फ चार आरोपियों तक सीमित नहीं है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह से जुड़े खरीदार कौन थे, नकली सिक्कों की सप्लाई किन इलाकों में की गई और यह नेटवर्क कब से चल रहा था. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि नकली सिक्के बनाने के लिए मशीनें कहां लगाई गई थीं, कच्चा माल कहां से आता था और अब तक कितने सिक्के बाजार में पहुंच चुके हैं. पुलिस को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
Fake Coin Racket: आम लोगों के लिए क्यों गंभीर है यह मामला
Fake Coin Racket जैसे मामलों में नकली सिक्के बाजार में आने से सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों और दुकानदारों को होता है. अगर किसी के पास गलती से नकली सिक्का पहुंच जाता है, तो उसका पैसा फंस सकता है. ज्यादा संख्या में नकली सिक्के बाजार में आने से लोगों के लिए असली और नकली सिक्कों की पहचान करना भी मुश्किल हो सकता है. इसी वजह से पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं, ताकि नकली सिक्कों के इस कारोबार को पूरी तरह रोका जा सके.

