न्यूज डेस्क: सनातन परंपरा में शुक्रवार का दिन देवी लक्ष्मी और शुक्र देव की पूजा के लिए खास माना जाता है। इस दिन सुख-समृद्धि, वैभव और सकारात्मकता के लिए पूजा-पाठ करने की परंपरा है। माता लक्ष्मी को कमल का फूल, सफेद मिठाई, खीर और सुगंधित चीजें अर्पित की जाती हैं।
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शुक्रवार को घर की साफ-सफाई का भी विशेष महत्व बताया जाता है। खासकर पूजा स्थल और मुख्य दरवाजे को साफ रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि देवी लक्ष्मी को साफ-सुथरा और व्यवस्थित घर पसंद है। इस दिन सफेद रंग को शुभ माना जाता है। कई जगहों पर जरूरतमंदों को चावल, दूध, सफेद कपड़े, चीनी जैसी चीजों का दान करने की परंपरा है। साथ ही, महिलाओं का सम्मान करने और किसी के साथ गलत व्यवहार से बचने की भी सलाह दी जाती है।
शुक्रवार को देवी लक्ष्मी की पूजा या व्रत रखने वाले लोग सात्विक भोजन करते हैं। कई परिवारों में इस दिन मांसाहार और शराब से परहेज किया जाता है। हालांकि, खान-पान से जुड़े नियम परिवार और व्रत की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। कुछ लोक और ज्योतिषीय मान्यताओं में शुक्रवार को किसी को पैसे या नमक देने से बचने की बात कही जाती है। इसी तरह, कुछ जगहों पर सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाने या कचरा बाहर निकालने से भी बचने की सलाह दी जाती है।
शुक्रवार को बाल कटवाने, शेविंग करने और नाखून काटने को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं हैं। कुछ परंपराओं में इन्हें शुभ माना जाता है, जबकि कुछ लोग शुक्र ग्रह से जुड़ी मान्यताओं के कारण इनसे बचते हैं। हालांकि, इन सभी बातों को सर्वमान्य धार्मिक नियम नहीं माना जा सकता। पूजा, स्वच्छता, दान और जरूरतमंदों की मदद जैसी परंपराएं कई परिवारों में प्रचलित हैं, जबकि पैसे, नमक, झाड़ू या बाल-नाखून से जुड़े नियमों को लोक और ज्योतिषीय मान्यताओं के रूप में ही देखना उचित है।

