News Desk: दिवाली का त्योहार आते ही बाजारों में मिठाइयों की मांग बढ़ गई है. लोग अपने घरों के लिए मिठाई खरीद रहे हैं, लेकिन इसी बीच Diwali Sweets Adulteration को लेकर चिंता भी बढ़ गई है. हरियाणा के बाजारों में पनीर, मावा, घी और मिठाइयों की कीमतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं. खास बात यह है कि जिस पनीर को बनाने में सिर्फ दूध की लागत ही 325 से 350 रुपये तक पहुंच जाती है, वही बाजार में 200 रुपये किलो तक बिक रहा है. मिठाई की चमक और कम कीमत लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है, लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाली चीजें कितनी सही हैं, इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं.
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Diwali Sweets Adulteration: 200 रुपये किलो पनीर पर सवाल
हरियाणा के बाजारों में पनीर 200 रुपये से लेकर 420 रुपये किलो तक बिक रहा है. पनीर बनाने के लिए करीब 5 किलो दूध की जरूरत होती है. वहीं दूध की कीमत 65 से 70 रुपये किलो के बीच है. इस हिसाब से सिर्फ दूध का खर्च ही 325 से 350 रुपये तक पहुंच जाता है. इसके बाद मजदूरी, बिजली, पैकिंग और ट्रांसपोर्ट का खर्च अलग होता है. ऐसे में अगर कोई पनीर बहुत कम कीमत पर मिल रहा है तो उसकी जांच जरूरी हो जाती है. हालांकि, सिर्फ कम कीमत के आधार पर किसी पनीर को मिलावटी नहीं कहा जा सकता, लेकिन कीमत और लागत के बीच का अंतर सवाल जरूर खड़ा करता है.
मेवा बर्फी और महंगी मिठाइयों में भी जांच की जरूरत
दिवाली के समय मेवा बर्फी, काजू कतली और दूसरी महंगी मिठाइयों की बिक्री काफी बढ़ जाती है. बाजार में मेवा बर्फी 500 से 700 रुपये किलो तक बिक रही है. इसे बनाने में दूध, मेवा, चीनी, घी और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. कई बार एक किलो मिठाई तैयार करने में 5 से 6 किलो दूध तक लग सकता है. इसके बाद मेवा, घी, मजदूरी और पैकिंग का खर्च जुड़ता है. ऐसे में Diwali Sweets Adulteration को रोकने के लिए मिठाई में इस्तेमाल होने वाली हर सामग्री की जांच जरूरी हो जाती है.
मिठाइयों पर चांदी के वर्क की चमक पर उठे सवाल
दिवाली की मिठाइयों पर लगा चांदी का वर्क लोगों को काफी आकर्षित करता है. लेकिन Diwali Sweets Adulteration के बीच इसी चमकदार परत को लेकर भी सवाल सामने आए हैं. बताया जा रहा है कि करीब 1000 रुपये की एक सीट से लगभग 10 किलो मिठाई पर वर्क लगाया जा सकता है. वहीं कुछ जगहों पर चांदी के नाम पर एल्युमिनियम वाले वर्क के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है. खाने वाली चीजों में इस्तेमाल होने वाला वर्क तय नियमों के अनुसार होना चाहिए. इसलिए Diwali Sweets Adulteration से बचने के लिए मिठाई खरीदते समय सिर्फ उसकी सजावट देखकर भरोसा नहीं करना चाहिए.
घी, तेल और मावे की भी हो रही जांच
मिठाई बनाने में दूध और पनीर के अलावा घी और खाद्य तेल का इस्तेमाल भी किया जाता है. लड्डू, जलेबी और गुलाब जामुन जैसी मिठाइयों में इन चीजों की भूमिका काफी अहम होती है. त्योहारों के दौरान मिठाई की मांग बढ़ने से उत्पादन भी बढ़ जाता है. ऐसे में सिर्फ तैयार मिठाइयों की जांच करना काफी नहीं है. मिठाई बनाने वाली जगहों और इस्तेमाल होने वाले सामान की भी जांच जरूरी है. Diwali Sweets Adulteration के बढ़ते मामलों को देखते हुए ग्राहकों को भी सावधान रहने की जरूरत है. बहुत ज्यादा सस्ती मिठाई खरीदने से पहले उसकी दुकान और बनाने के तरीके पर ध्यान देना चाहिए.
हरियाणा के बाजारों में खाद्य सुरक्षा विभाग की नजर
मिठाई खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान
दिवाली पर मिठाई खरीदना हर परिवार की खुशी का हिस्सा होता है, लेकिन Diwali Sweets Adulteration जैसी चिंताओं के बीच थोड़ी सावधानी रखना भी जरूरी है. हमेशा ऐसी दुकान से मिठाई खरीदें जहां साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता हो. बहुत ज्यादा कम कीमत वाली मिठाइयों से बचें और पैक मिठाई लेते समय उसकी तारीख जरूर देखें. मिठाई की चमक और स्वाद के साथ उसकी शुद्धता भी जरूरी है. आने वाले दिनों में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट से साफ होगा कि बाजार में बिक रही मिठाइयों में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं है. Diwali Sweets Adulteration को लेकर बढ़ती जांच के बीच ग्राहकों को सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि त्योहार की खुशी किसी परेशानी में न बदले.
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