Thursday, July 2, 2026

जमशेदपुर मामले में मुख्यमंत्री की कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति, पुलिसकर्मियों पर कब दर्ज होगी प्राथमिकी : बाबूलाल मरांडी

रांची : नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जमशेदपुर हत्याकांड के मामले में मुख्यमंत्री द्वारा एसपी/एसएसपी को सस्पेंड किए जाने की कार्रवाई को सिर्फ खानापूर्ति करार दिया है। एसपी को हटाना कोई सजा नहीं है। पुलिस के सामने किसी की हत्या होती है तो इसके लिए पूरी तरह पुलिस जिम्मेवार है। जो जानकारी है कि अभी तक पुलिसकर्मियों पर कोई एफआईआर नहीं किया गया है और न ही ऐसी कोई मंशा दिख रही है। यदि मुख्यमंत्री वास्तव में हत्याकांड के दोषियों को सजा दिलाने के लिए गंभीर हैं तो उन पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज कराएं, जिनकी मौजूदगी में हत्या हुई है।

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बाबूलाल मरांडी ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उल्टा उन लोगों पर एफआईआर किया गया है जिनके होटल से वे लोग खाना खाकर निकले थे। अगर किसी के घर से कोई खाना खाकर निकलता है और सड़क पर पुलिस की मौजूदगी में किसी की हत्या हो जाती है तो उसमें उस घर वाले/होटल मालिक का क्या दोष? झारखंड में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। कहीं कानून नाम की कोई चीज नहीं है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की इस बिगड़ी स्थिति के लिए सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जिम्मेवार ठहराया। उन्होंने कहा कि जो जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात एक ASI अजय सिंह के सामने डीजीपी तक नतमस्तक हैं। पुलिस अधिकारियों के तबादले से लेकर अवैध वसूली तक के कार्य उनके इशारे पर ही हो रहे हैं। जब तक यह परंपरा चलती रहेगी, शासन-प्रशासन ऐसे काम करेगा तब तक प्रदेश की कानून व्यवस्था भला कैसे सुदृढ़ हो सकती है।

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